चित्तौड़गढ़ जिले की राशमी तहसील के हरनाथपुरा में एक घर में दुर्लभ इंडियन एग-ईटिंग स्नेक मिलने से परिवार में भय का माहौल बन गया। रमेश कच्छावा के घर में सांप दिखाई देने के बाद परिवार ने तत्काल इसकी सूचना वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण समिति के अध्यक्ष मनीष तिवारी को दी। सूचना मिलते ही राशमी से समिति सदस्य हरलाल को मौके पर भेजा गया।

रात्रि में काफी तलाश के बावजूद सांप दिखाई नहीं दिया। इसके बाद सुबह उसी घर में फिर वही सांप नजर आया। एक बार फिर समिति सदस्य हरलाल को मौके पर भेजा गया। प्रारंभिक निरीक्षण में सांप की सटीक पहचान स्पष्ट नहीं हो सकी। इसके बाद चित्तौड़गढ़ से पियूष कांबले एवं रामकुमार साहू के नेतृत्व में एक टीम राशमी के लिए रवाना हुई।

टीम ने मौके पर पहुंचकर सांप का बारीकी से निरीक्षण किया। शरीर के विशिष्ट पैटर्न, सिर की बनावट और अन्य पहचान संबंधी विशेषताओं का अध्ययन करने के बाद सांप की पहचान क्षेत्र के लिए दुर्लभ इंडियन एग-ईटिंग स्नेक के रूप में हुई।

इंडियन एग-ईटिंग स्नेक एक अत्यंत विशिष्ट भोजन प्रणाली वाला विषहीन सांप है, जो मुख्य रूप से पक्षियों के अंडों पर निर्भर करता है। इसकी गुप्त जीवनशैली और कम दिखाई देने के कारण यह सांप बहुत ही दुर्लभ प्रजाति में आता है।

इस प्रजाति का सांप सवाई माधोपुर के भैरोड़ा खुर्द गांव में भी पाया गया था, जो लगभग 1 फीट 8 इंच का मृत सांप था। वहीं चित्तौड़गढ़ जिले के राशमी में मिला यह सांप 2 फीट का है और जीवित रूप में राजस्थान में पहला रिकॉर्ड हुआ है।

टीम ने सांप का सुरक्षित ढंग से रेस्क्यू किया। इसके शरीर के पैटर्न, सिर की संरचना, स्केल और पहचान संबंधी विशेषताओं की विस्तृत फोटोग्राफी भी की गई। रेस्क्यू के बाद टीम ने सांप को किसी दूरस्थ स्थान पर ले जाने के बजाय उसके उपयुक्त प्राकृतिक आवास को प्राथमिकता दी।

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