चित्तौड़गढ़ में तेज अंधड़ और बारिश, भीषण गर्मी व लू से मिली राहत
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में मौसम का मिजाज बदलने से तापमान में गिरावट आई है, हालांकि तेज आंधी और जलभराव के कारण यातायात प्रभावित हुआ।

चित्तौड़गढ़ में सोमवार दोपहर बाद हुई अचानक तेज बारिश के बाद सड़कों पर जलभराव की स्थिति बन गई, जिससे वाहन चालकों को रेंगते ट्रैफिक और कम दृश्यता के बीच हेडलाइट जलाकर निकलना पड़ा
मौसम विभाग द्वारा जारी की गई चेतावनी का असर सोमवार को चित्तौड़गढ़ जिले में साफ तौर पर देखने को मिला। पिछले कई दिनों से रिकॉर्ड तोड़ प्रचंड गर्मी और झुलसाने वाली लू का सामना कर रहे जिला वासियों को सोमवार दोपहर बाद प्रकृति के बदले रूप ने बड़ी राहत दी। हालांकि, इस अचानक आई तेज बारिश और अंधड़ के कारण शहर की रफ्तार पर कुछ समय के लिए ब्रेक जरूर लग गया।
दिन की शुरुआत रोज की तरह ही तीखी धूप और उमस के साथ हुई थी, लेकिन दोपहर बाद अचानक मौसम ने करवट ली। आसमान में देखते ही देखते काली घटाएं घिर आईं और पूरा शहर मानो शाम के साए में डूब गया। इसके तुरंत बाद ही तेज रफ्तार अंधड़ शुरू हो गई। अंधड़ के थमते ही मेघ जमकर बरसे, जिससे पूरा इलाका तरबतर हो गया।
अचानक हुई इस तेज बारिश के कारण शहर के ड्रेनेज सिस्टम की पोल खुल गई। देखते ही देखते शहर के मुख्य चौराहों, रिहायशी इलाकों और निचली बस्तियों की सड़कों पर पानी जमा हो गया। सड़कों पर जलभराव के कारण दुपहिया और चौपहिया वाहन चालकों को निकलने में खासी मशक्कत करनी पड़ी। आंधी और तेज बारिश के कारण दृश्यता काफी कम हो गई, जिससे चालकों को दिन में ही वाहनों की हेडलाइट जलानी पड़ी और ट्रैफिक रेंगता नजर आया।
इस बारिश का सबसे सकारात्मक पहलू यह रहा कि पिछले कई दिनों से जारी भीषण गर्मी से तड़प रहे लोगों को तात्कालिक राहत मिल गई। बारिश के बाद ठंडी हवाएं चलने से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। वातावरण में घुली इस ठंडक से मौसम बेहद खुशनुमा हो गया है और लोगों ने उमस व तपिश से राहत की सांस ली है। घरों से बाहर निकले लोग इस सुहावने मौसम का लुत्फ उठाते नजर आए।
मौसम विभाग के अनुसार आगामी 24 से 48 घंटों में जिले के कुछ और हिस्सों में इसी तरह की तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। आधिकारिक स्तर पर प्रशासन ने आमजन से विशेष अपील की है कि तेज अंधड़ और आकाशीय बिजली चमकने के दौरान पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें और सुरक्षित स्थानों पर रहें। प्रकृति के इस अचानक आए बदलाव ने जहां एक ओर व्यवस्थाओं को चुनौती दी है, वहीं दूसरी ओर झुलसते चित्तौड़गढ़ को जीवनदायिनी शीतलता प्रदान की है।

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