चित्तौड़गढ़ में 28 जून से पल्स पोलियो अभियान: शून्य से पांच वर्ष के बच्चों को मिलेगी सुरक्षा कवच
चित्तौड़गढ़ में पल्स पोलियो अभियान की तैयारी तेज। 28 जून से तीन दिनों तक चलने वाले इस महाभियान में शून्य से पांच वर्ष के बच्चों को पोलियो से सुरक्षा का कवच दिया जाएगा। जानें, कैसे प्रशासन ने बनाई है बच्चों के स्वास्थ्य की ठोस कार्ययोजना।

चित्तौड़गढ़ में आगामी पल्स पोलियो कार्यक्रम की कार्ययोजना को अंतिम रूप देने के लिए जिला ग्रामीण विकास अभिकरण सभागार में आयोजित टास्क फोर्स की बैठक।
चित्तौड़गढ़, 22 जून 2026। नन्हे-मुन्नों के स्वास्थ्य की रक्षा और उन्हें पोलियो जैसी घातक बीमारी से सुरक्षित रखने के संकल्प के साथ, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग आगामी 28 जून से उप-राष्ट्रीय पल्स पोलियो कार्यक्रम का आगाज करने जा रहा है। इस महत्वपूर्ण अभियान की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए आज जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के सभागार में अतिरिक्त जिला कलक्टर (भू.अ.) रामचन्द्र खटीक की अध्यक्षता में जिला टास्क फोर्स की बैठक आयोजित की गई। इस उच्चस्तरीय बैठक में शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, ऊर्जा और पेयजल सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने आगामी 28 से 30 जून तक चलने वाले तीन दिवसीय कार्यक्रम की कार्ययोजना का खाका पेश किया। भारत सरकार के निर्देशों के अनुरूप, इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जिले के शून्य से पांच वर्ष तक के हर एक बच्चे का स्वास्थ्य प्रतिरक्षण सुनिश्चित करना है। बैठक की अध्यक्षता करते हुए अतिरिक्त जिला कलक्टर ने सभी संबंधित विभागों को इस महाभियान में सक्रिय भूमिका निभाने के कड़े निर्देश दिए हैं।
जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रियंका वर्मा ने कार्यक्रम की बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सफलता सुनिश्चित करने के लिए सभी बीसीएमओ को अपने-अपने क्षेत्रों का गहन भ्रमण करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत पोलियो बूथों के निर्धारण, वैक्सीन के रखरखाव के लिए डी-फ्रीज की व्यवस्था और वीवीएम व सीसीबी की कार्ययोजना की निगरानी अनिवार्य की गई है। साथ ही, अभियान के दौरान सुपरवाइजरों और वैक्सिनेटर्स की नियुक्ति को भी प्राथमिकता पर रखा गया है।
प्रशासन की योजना के अनुसार, 28 जून को पोलियो बूथों पर दवा पिलाई जाएगी, जबकि 29 और 30 जून को स्वास्थ्य कर्मियों की टीमें घर-घर जाकर छूटे हुए बच्चों को चिन्हित कर उन्हें पोलियो की खुराक पिलाएंगी। भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों जैसे बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और हाट-बाजारों में विशेष ट्रांजिट टीमें तैनात की जाएंगी ताकि कोई भी बच्चा टीकाकरण से वंचित न रहे। यह अभियान न केवल चिकित्सा विभाग की जिम्मेदारी है, बल्कि एक सामाजिक अभियान भी है, जिसमें आंगनवाड़ी और शिक्षा विभाग की भागीदारी से बच्चों की अधिकतम उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी।

