चित्तौड़गढ़ में बाल विवाह के खिलाफ हुंकार: मासूमों के सुरक्षित भविष्य के लिए जन-जागरूकता का शंखनाद
चित्तौड़गढ़ में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत सांवरिया कोचिंग क्लास में विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिला कलक्टर आलोक रंजन के निर्देशन में बाल अधिकारिता विभाग ने विद्यार्थियों को कानून और 1098 हेल्पलाइन की जानकारी दी। सहायक निदेशक ओम प्रकाश तोषनीवाल सहित विशेषज्ञों ने बच्चों को इस कुप्रथा के खिलाफ शपथ दिलाई और सुरक्षित भविष्य का संकल्प लिया।

चित्तौड़गढ़। बचपन की दहलीज पर जब जिम्मेदारियों का बोझ डाल दिया जाता है, तो न केवल एक मासूम का भविष्य धुंधला होता है, बल्कि समाज की प्रगति की नींव भी कमजोर पड़ जाती है। बाल विवाह जैसी सदियों पुरानी सामाजिक कुरीति की जड़ों को उखाड़ने के संकल्प के साथ, चित्तौड़गढ़ में बाल अधिकारिता विभाग द्वारा '100 दिवसीय बाल विवाह मुक्त भारत अभियान' को अब एक नया और प्रभावी आयाम मिला है। जिला कलक्टर आलोक रंजन के कुशल निर्देशन में संचालित इस मुहिम के तहत शहर की सांवरिया कोचिंग क्लास में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसने भावी पीढ़ी के मन में कुरीतियों के विरुद्ध लड़ने का नया जज्बा पैदा किया है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक ओम प्रकाश तोषनीवाल ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि प्रशासन का ध्येय केवल कानून लागू करना नहीं, बल्कि समाज की मानसिकता में सकारात्मक बदलाव लाना है। उन्होंने बताया कि जिला कलक्टर के स्पष्ट निर्देशों के बाद पूरे जिले में सघन जागरूकता गतिविधियां चलाई जा रही हैं, ताकि कोई भी मासूम इस कुप्रथा की भेंट न चढ़े। इसी कड़ी में चाइल्ड हेल्पलाइन के सुपरवाइजर राहुल सिंह सोलंकी एवं सरिता मीणा ने विद्यार्थियों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम की बारीकियों से रूबरू कराया। उन्होंने रेखांकित किया कि बाल विवाह न केवल एक दंडनीय अपराध है, बल्कि यह बच्चों के मानसिक, शारीरिक और शैक्षणिक विकास के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है।
चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम ने युवाओं को सशक्त बनाते हुए इस बात पर जोर दिया कि यदि समाज के किसी भी कोने में बाल विवाह जैसी घटना की सूचना मिले, तो बिना डरे टोल-फ्री नंबर 1098 पर संपर्क करें। अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान को पूर्णतः गोपनीय रखा जाता है। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने न केवल कानूनों को समझा, बल्कि समाज में शिक्षा के महत्व और अपने मौलिक अधिकारों के प्रति सजग रहने का संकल्प भी लिया। संवाद सत्र के दौरान बच्चों के उत्साह ने यह स्पष्ट कर दिया कि जागरूकता की यह मशाल अब थमने वाली नहीं है।
इस गरिमामय अवसर पर संस्था प्रधान शिव राज सिंह झाला और मुकेश गुर्जर सहित क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। उपस्थित अतिथियों ने समाज में व्याप्त इस कुप्रथा के विरुद्ध एकजुट होकर कार्य करने और बच्चों के समग्र विकास के लिए एक सुरक्षित वातावरण निर्मित करने की अपील की। कार्यक्रम के समापन पर सभी विद्यार्थियों और अतिथियों ने एक स्वर में बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाने और इसे जड़ से मिटाने में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाने की सामूहिक शपथ ली। चित्तौड़गढ़ से उठी यह आवाज अब जिले के हर गांव और ढाणी तक पहुंच रही है, जो एक बाल विवाह मुक्त समाज के निर्माण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

Pratahkal Bureau
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