चित्तौड़गढ़। अखिल भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के आह्वान और राजस्थान पेंशनर समाज प्रांतीय कार्यालय के निर्देशों की पालना में चित्तौड़गढ़ के पेंशनर्स ने हुंकार भरी है। भारत सरकार द्वारा पेंशनर्स के हितों के विरुद्ध जारी किए गए 'वैद्यता अधिनियम 2025' के विरोध में राजस्थान पेंशनर समाज और केंद्रीय पेंशनर्स एसोसिएशन ने संयुक्त रूप से काली पट्टी बांधकर 'काला दिवस' मनाया और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। पेंशनर्स का यह आक्रोश केंद्र और राज्य सरकार की उन नीतियों के खिलाफ है, जिन्हें वे अपने अधिकारों पर कुठाराघात मान रहे हैं।

प्रदर्शन के दौरान जोश-खरोश से लबरेज केंद्रीय एवं राज्य सरकार के पेंशनर्स ने काली पट्टी बांधकर सरकार के प्रति अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। आंदोलनकारियों की मुख्य मांग है कि 25 मार्च को अनुमोदित उस विवादित आदेश को तत्काल निरस्त किया जाए जो उनकी सुविधाओं में कटौती करता है। पेंशनर्स ने सरकार से स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उन्हें पूर्व में मिलने वाली समस्त सुविधाएं और परिलाभ यथावत बहाल किए जाएं तथा इस दमनकारी अधिसूचना को बिना विलंब वापस लेकर पेंशनभोगियों को राहत प्रदान की जाए।

इस विरोध प्रदर्शन के दौरान सभा को संबोधित करते हुए अलानूर खां और कालूराम जीनगर ने अपने विचार व्यक्त किए और सरकार की नीतियों की कड़े शब्दों में आलोचना की। राजस्थान पेंशनर समाज के अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण दशोरा ने ज्ञापन का वाचन किया और अधिनियम से होने वाले नुकसान के बारे में विस्तृत जानकारी दी। इसके पश्चात, सभी पेंशनर एक विशाल जुलूस के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां अपनी मांगों का मांग पत्र जिला कलेक्टर को सौंपा गया।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर बी.एल. ओझा, यशवंत दशोरा, सोहनलाल पाण्ड्या, सुरेशचन्द्र शर्मा, गौरीशंकर दशोरा, मनोहरलाल सोनी, प्रहलादराय हेडा, भैंरूशंकर व्यास, प्रदीप दीक्षित, बून्दीलाल मेहता, सत्यनारायण भट्ट, कन्हैयालाल पुरोहित, जफरूल्लाखां, राजकुमार दशोरा, लक्ष्मीनारायण वीर सहित भारी संख्या में पेंशनर्स उपस्थित रहे। यह आंदोलन इस बात का स्पष्ट संकेत है कि यदि पेंशनर्स के मान-सम्मान और हक से समझौता किया गया, तो आने वाले समय में यह विरोध और अधिक उग्र रूप ले सकता है।

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