जिले की ग्राम पंचायतों में प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से तैनात सुरक्षा गार्डों का धैर्य अब जवाब दे गया है। पिछले डेढ़ वर्ष से मानदेय और पीएफ विसंगतियों से जूझ रहे इन कर्मियों ने अब आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। सुरक्षा गार्डों के संगठन ने सरपंचों पर 'दबंगई' का गंभीर आरोप लगाते हुए सांसद, जिला कलेक्टर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि उनकी सेवाओं को निरंतर रखा जाए, बकाया मानदेय का अविलंब भुगतान हो और पीएफ खातों का सही रखरखाव सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, विकास अधिकारी एवं ग्राम विकास अधिकारी द्वारा जिले के गार्डों की संपूर्ण सूचना कार्मिक विभाग को तत्काल भेजने की पुरजोर मांग की गई है।

रामप्रसाद सालवी ने वस्तुस्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि राजस्थान सरकार द्वारा पंचायतों के राजीव गांधी सेवा केंद्रों की सुरक्षा एवं रखरखाव हेतु वर्ष 2013 से चित्तौड़गढ़ की सभी ग्राम पंचायतों में प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए सुरक्षा गार्ड नियुक्त किए गए थे। विडंबना यह है कि केवल चौकीदारी के कार्य के लिए अनुबंधित इन गार्डों से 24 घंटे काम लिया जा रहा है, परंतु उन्हें समय पर मानदेय नसीब नहीं हो रहा है। ठेकेदार द्वारा उनके वेतन से पीएफ की कटौती तो की जा रही है, लेकिन वह राशि उनके खातों में जमा नहीं हो रही। वर्तमान में इन कर्मियों का लगभग 15 माह का मानदेय बकाया है, जिससे उनके समक्ष गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

संकट तब और गहरा गया जब हाल ही में कई सुरक्षा गार्डों को सरपंच और सचिव द्वारा मौखिक रूप से यह कह दिया गया कि उनकी सेवाएं केवल 31 मार्च तक ही प्रभावी हैं। संगठन का आरोप है कि कई स्थानों पर सरपंचों द्वारा दबंगई दिखाते हुए कार्यालय के ताले बदल दिए गए हैं और गार्डों को कार्य करने से रोका जा रहा है। प्रशासनिक शिथिलता का आलम यह है कि विकास अधिकारी और ग्राम विकास अधिकारी ने आज दिन तक इन गार्डों का विवरण जयपुर स्थित कार्मिक विभाग को प्रेषित नहीं किया है। ज्ञापन सौंपने के दौरान बाबूलाल धाकड़, मोहनदास, अशोक कुमार, केसरसिंह, अर्जुनसिंह, रतनसिंह, भंवरसिंह, कन्हैयालाल, माधुलाल, युधिष्ठिर, रामलाल, मुकेश, सुरेश, भेरूलाल, छोटूलाल, मुकेशदास, मदनलाल, उदयसेन, और शंकरलाल सहित बड़ी संख्या में सुरक्षा गार्ड उपस्थित रहे, जिन्होंने प्रशासन से इस शोषणकारी व्यवस्था से शीघ्र निजात दिलाने की गुहार लगाई है।

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