चित्तौड़गढ़: अफीम तौल प्रक्रिया अंतिम चरण में, CPS पद्धति से भुगतान शुरू
नारकोटिक्स विभाग ने 23 अप्रैल तक डोडा तौल पूरा करने का लक्ष्य रखा है, किसानों के खातों में सीधे करोड़ों रुपये भेजे गए।

चित्तौड़गढ़ में नारकोटिक्स विभाग के तौल केंद्र पर सीपीएस पद्धति के तहत डोडा चूरा की शुद्धता और वजन की जांच करते अधिकारी और किसान।
चित्तौड़गढ़। बेशकीमती उपज और काला सोना के नाम से विख्यात अफीम की तौल प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है, जहाँ केंद्र सरकार के नारकोटिक्स विभाग की निगरानी में बड़े स्तर पर किसानों को भुगतान किया जा चुका है।
गम पद्धति से अफीम देने वाले किसानों का कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि सीपीएस पद्धति के तहत डोडा चूरा की तौल जारी है और इसे 23 अप्रैल तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रथम खंड में सीपीएस पद्धति से खेती करने वाले किसानों में भारी उत्साह देखा गया। कुल 317 गांव के 5 हजार 910 किसानों के 49,002 किलो डोडो का तौल किया गया, जिसके बदले 200 रुपये प्रति किलो की दर से करोड़ों रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
नारकोटिक्स विभाग द्वारा किसानों के बैंक खातों में अब तक करोड़ों रुपये सीधे हस्तांतरित किए जा चुके हैं, जिससे अफीम उत्पादक क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था में नई गति आई है। तौल प्रक्रिया के लिए विभाग ने अलग-अलग खंड निर्धारित किए थे, जिनमें से अधिकांश का कार्य पूर्ण हो चुका है। प्रथम एवं तृतीय खंडों में गम और सीपीएस पद्धति के तहत कार्य लगभग एक सप्ताह पूर्व ही सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया गया था, जिससे सैकड़ों किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य प्राप्त हुआ।
द्वितीय खंड में वर्तमान में सीपीएस पद्धति के तहत डोडो की तौल जारी है, जिसे 23 अप्रैल तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। पारंपरिक पद्धति में किसान अफीम के डोडे पर चीरा लगाकर दूध एकत्रित करते हैं, जबकि सीपीएस पद्धति में डोडे पर चीरा लगाने की अनुमति नहीं होती और किसान को पूरा डोडा विभाग को सौंपना पड़ता है, जिसके बदले निर्धारित मूल्य का भुगतान किया जाता है।
तौल केंद्रों पर पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विभाग ने पुख्ता व्यवस्थाएं की हैं। प्रत्येक किसान की उपज का वजन आधुनिक मशीनों से किया जा रहा है और गुणवत्ता जांच के बाद तुरंत डाटा अपडेट किया जा रहा है, जिससे भुगतान में किसी प्रकार की देरी न हो।
अफीम तौल की यह व्यापक प्रक्रिया न केवल किसानों को आर्थिक मजबूती दे रही है, बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार भी कर रही है।

Pratahkal Bureau
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