चित्तौड़गढ़। मेवाड़ और मालवा के खेतों में इन दिनों एक अलग ही रौनक और सतर्कता देखने को मिल रही है। क्षेत्र की सबसे मूल्यवान फसल, जिसे "काला सोना" कहा जाता है, अब पूरी तरह पककर तैयार हो चुकी है।


परंपरागत शुरुआत और गहरी आस्था

चित्तौड़गढ़ जिले में, जो अफीम उत्पादन में देश का अग्रणी केंद्र है, किसानों ने परंपरागत पूजा-अर्चना के साथ अफीम की लुराई और चिराई का कार्य विधिवत शुरू कर दिया है। अफीम की खेती में जितनी मेहनत है, उतनी ही गहरी किसानों की आस्था भी है।

  • किसान इस फसल को एक पौधे के रूप में नहीं, बल्कि अपने घर के नन्हे बालक की तरह पालते हैं।
  • फसल की सुरक्षा और अच्छी पैदावार के लिए किसान कालिका माता के दरबार में पहुंचकर पाती मांगते हैं।
  • इसके बाद खेतों में ही देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं, ताकि ईश्वरीय कृपा से फसल निर्विघ्न घर आ सके।

लुराई-चिराई की जटिल प्रक्रिया

अफीम निकालने की प्रक्रिया बेहद जटिल और धैर्य वाली होती है:

"दोपहर के समय किसान डोड़ों पर विशेष औजारों से चीरा लगाते हैं, जिससे रात भर उसमें से दूध निकलता रहता है।"

अगले दिन तड़के सूर्याेदय से पहले, किसान पूरे परिवार के साथ खेत में जुट जाते हैं और डोड़ों पर जमे हुए उस दूध को इकट्ठा करते हैं, जो सूखकर अफीम का रूप ले लेता है।


सुरक्षा के कड़े इंतजाम: खेतों में सीसीटीवी और नेट

इस फसल की कीमत जितनी अधिक है, इसका जोखिम भी उतना ही बड़ा है। फसल को बचाने के लिए किसानों ने खेतों को छावनी में तब्दील कर दिया है।

  • पशु-पक्षी से बचाव: अफीम के डोड़े तोतों के पसंदीदा होते हैं, जिनसे बचाने के लिए पूरे खेत पर नेट लगाया गया है। आवारा पशुओं और रोजड़ों से बचाव के लिए किसान खेतों में ही डेरा डाले हुए हैं।
  • तकनीकी निगरानी: फसल की चोरी रोकने के लिए किसानों ने खेतों के चारों ओर कंटीले तारों की बाड़ लगाई है और कई आधुनिक किसानों ने तो खेतों में सीसीटीवी कैमरे तक इंस्टॉल किए हैं।

बंपर पैदावार की उम्मीद

इस वर्ष मौसम के मिजाज ने किसानों का साथ दिया है। पिछले चार महीनों की जी-तोड़ मेहनत के बाद अब डोड़ों की रंगत और उनसे निकलने वाले दूध की मात्रा को देखकर किसानों के चेहरों पर चमक है। यदि आगामी कुछ दिनों तक मौसम साफ रहता है, तो चित्तौड़गढ़ जिले में इस बार अफीम का रिकॉर्ड उत्पादन होने की संभावना है।

Piyush Mundara, Chittorgarh

Piyush Mundara, Chittorgarh

नाम: पियूष मूंदड़ा

वर्तमान पद: संवाददाता

कार्यक्षेत्र: चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)

अनुभव: साल 2013 से

विशेष रुचि: अपराध (क्राइम) और वन्य जीव (Wildlife) रिपोर्टिंग

बीट और कवरेज 

  • स्थानीय समाचार: चित्तौड़गढ़ जिला और संबंधित तहसीलों की सभी स्थानीय खबरों की नियमित कवरेज।
  • क्राइम एवं वन्य जीव: पुलिस कार्रवाई, कानून-व्यवस्था, अपराध संबंधी घटनाओं के साथ-साथ वन्य जीव और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों की विशेष रिपोर्टिंग।
  • राजनीति: स्थानीय निकाय, संगठनात्मक गतिविधियां और क्षेत्रीय राजनीतिक घटनाक्रम।
  • प्रशासन: सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली, प्रशासनिक निर्णय, जनसुनवाई और विकास कार्यों की समीक्षा।
  • शिक्षा एवं स्वास्थ्य: शैक्षणिक संस्थानों की गतिविधियां, विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दे, चिकित्सा सेवाएं और स्वास्थ्य योजनाओं का कवरेज।
  • बिज़नेस: स्थानीय बाजार, व्यापारिक गतिविधियां और आर्थिक समाचार।

शैक्षणिक योग्यता

  • स्नातक (Graduate)
  • डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)

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