चित्तौड़गढ़: नारकोटिक्स विभाग ने शुरू की सीपीएस पद्धति से अफीम डोडों की तौल प्रक्रिया
विभाग द्वारा डोडों को पीसकर पाउडर बनाने की प्रक्रिया शुरू, पारंपरिक खेती की तुलना में सीपीएस पद्धति से किसानों को मिलेगी मशक्कत से राहत।

चित्तौड़गढ़। जिला मुख्यालय स्थित नारकोटिक्स विभाग के परिसर में इन दिनों अफीम उत्पादक किसानों और विभागीय अधिकारियों की भारी चहल-पहल के बीच अफीम संग्रहण प्रक्रिया के नए चरण का आगाज हो चुका है। पारंपरिक पद्धति से अफीम का तौल कार्य सफलतापूर्वक संपन्न होने के पश्चात, विभाग ने अब सीपीएस (कंसंट्रेटेड पॉपी स्ट्रॉ) पैटर्न के तहत खेती करने वाले किसानों के डोडों के तौल और उनके त्वरित निस्तारण की प्रक्रिया को गति दे दी है।
उल्लेखनीय है कि अफीम तौल का मुख्य कार्य पूर्व में दो चरणों में पूरा किया गया था, जिसमें उन किसानों ने अपनी उपज जमा कराई थी जिन्होंने पारंपरिक तरीके से डोडों पर चीरा लगाकर अफीम का दूध निकाला था। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा प्रवर्तित आधुनिक सीपीएस पद्धति के अंतर्गत किसानों को डोडों पर चीरा लगाने की वैधानिक अनुमति नहीं होती है। इसी क्रम में किसान अब अपने खेतों से डंठल सहित वे समूचे डोडे लेकर केंद्र पर पहुंच रहे हैं, जिनसे अफीम का दूध नहीं निकाला गया है।
विभाग द्वारा इन डोडों का विधिवत वजन किया जा रहा है ताकि सरकारी रिकॉर्ड की सटीकता सुनिश्चित की जा सके। पारदर्शिता और सुरक्षा के कड़े मानकों का पालन करते हुए तौल के तुरंत बाद इन डोडों को कंप्रेशर मशीन में डाला जा रहा है, जहाँ उन्हें पीसकर पाउडर में तब्दील किया जा रहा है। मादक पदार्थों के दुरुपयोग की किसी भी गुंजाइश को समाप्त करने के लिए यह पूरी प्रक्रिया वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों की प्रत्यक्ष निगरानी में संपन्न की जा रही है।
जहाँ पारंपरिक अफीम खेती में किसानों को रात-दिन खेतों की रखवाली और चीरा लगाने की कठिन मशक्कत से गुजरना पड़ता था, वहीं सीपीएस पैटर्न ने इस जटिल प्रक्रिया को सुगम बना दिया है। यद्यपि इस नवीन पद्धति में किसान स्वयं अफीम का दूध संग्रहित नहीं कर सकते और उन्हें पूरा डोडा ही विभाग को सौंपना अनिवार्य होता है, किंतु यह बदलाव अफीम निष्कर्षण की व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण और सुरक्षित मील का पत्थर साबित हो रहा है।

Piyush Mundara, Chittorgarh
नाम: पियूष मूंदड़ा
वर्तमान पद: संवाददाता
कार्यक्षेत्र: चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)
अनुभव: साल 2013 से
विशेष रुचि: अपराध (क्राइम) और वन्य जीव (Wildlife) रिपोर्टिंग
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शैक्षणिक योग्यता
- स्नातक (Graduate)
- डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)
