चित्तौड़गढ़। शहर में गुलाबी सर्दी अब कड़कती ठंड में बदल चुकी है, और न्यूनतम तापमान में लगातार गिरावट के कारण आमजन गर्म कपड़ों और अलाव के सहारे अपनी सुरक्षा कर रहे हैं। ऐसे में नगर परिषद द्वारा संचालित रैन बसेरों का महत्व और बढ़ गया है, लेकिन जब इनकी सबसे अधिक जरूरत है, तब ये खुद गंभीर बदहाली का शिकार हैं।

शहर में दो स्थायी रैन बसेरे—जिला चिकित्सालय और चंदेरिया रेलवे स्टेशन पर—साथ ही दो अस्थायी रैन बसेरे—रेलवे स्टेशन और रोडवेज बस स्टैंड पर—सर्दियों में संचालित किए जाते हैं। इन स्थायी रैन बसेरों की स्थिति चिंताजनक है। खिड़कियां और दरवाजे टूटे हुए हैं, जिससे रात में ठंडी हवाएं सीधे अंदर आती हैं। परिसर में नियमित सफाई का अभाव और गंदगी का आलम है।

सर्दी से बचाव के लिए आवश्यक गरम कंबल और बिस्तरों की भारी कमी है, जबकि पीने के पानी और शौचालय की उचित व्यवस्था भी नहीं है। कई आश्रय स्थल असामाजिक तत्वों का अड्डा बन चुके हैं, जिससे जरूरतमंद लोग इन स्थानों पर आने से हिचकिचा रहे हैं।

नगर परिषद हर वर्ष रैन बसेरों के संचालन और रखरखाव के लिए लाखों रुपये का बजट आवंटित करती है। नगर परिषद आयुक्त कृष्ण गोपाल माली ने बताया कि परिषद इनकी देखभाल पर प्रतिमाह लगभग 25 हजार रुपए खर्च करती है, लेकिन सुधार केवल सर्दियों के सीजन की शुरुआत में ही अस्थाई रूप से किया जाता है। शहर में कुल 170 आश्रितों के ठहरने की व्यवस्था है, जिसमें जिला चिकित्सालय में 44, चंदेरिया रेलवे स्टेशन पर 50, रेलवे स्टेशन अस्थायी रैन बसेरे में 25 और रोडवेज बस स्टैंड पर 50 लोग ठहर सकते हैं।

आयुक्त माली ने बताया कि कर्मचारियों के साथ बैठक कर सभी कमियों को दूर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। रेलवे स्टेशन और रोडवेज बस स्टैंड पर अस्थायी व्यवस्थाओं को जल्द पूर्ण किया जाएगा। इसमें गर्म पानी, नियमित सफाई, चिकित्सा अधिकारियों को पत्र भेजकर फर्स्ट-एड और आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता, अन्नपूर्णा रसोई के स्थान का आकलन और भोजन की व्यवस्था शामिल है। इसके साथ ही सड़कों पर सो रहे बेसहारा लोगों को निकटतम रैन बसेरों तक पहुंचाने के लिए नाइट पेट्रोलिंग भी की जाएगी।

नगर परिषद की यह पहल न केवल बेसहारा लोगों के लिए राहत का संदेश है, बल्कि शहर में सामाजिक सुरक्षा और मानवीय जिम्मेदारी की गंभीरता को भी उजागर करती है। बढ़ती सर्दी में इन रैन बसेरों के सुचारू संचालन से शहर के जरूरतमंद नागरिकों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद जताई जा रही है।

Pratahkal Bureau

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