चित्तौड़गढ़ में बढ़ती ठंड में रैन बसेरों की बदहाल स्थिति, नगर परिषद करेगी सुधार की कार्रवाई
चित्तौड़गढ़ में बढ़ती ठंड के बीच नगर परिषद के रैन बसेरों की बदहाल स्थिति चिंता का विषय बन गई है। टूटी खिड़कियां, गंदगी, कंबल और बिस्तरों की कमी के कारण बेसहारा लोग जोखिम में हैं। नगर परिषद जल्द सुधार और संचालन की कवायद शुरू करेगी, जिससे सर्दियों में जरूरतमंदों को सुरक्षित आश्रय मिल सकेगा।

चित्तौड़गढ़। शहर में गुलाबी सर्दी अब कड़कती ठंड में बदल चुकी है, और न्यूनतम तापमान में लगातार गिरावट के कारण आमजन गर्म कपड़ों और अलाव के सहारे अपनी सुरक्षा कर रहे हैं। ऐसे में नगर परिषद द्वारा संचालित रैन बसेरों का महत्व और बढ़ गया है, लेकिन जब इनकी सबसे अधिक जरूरत है, तब ये खुद गंभीर बदहाली का शिकार हैं।
शहर में दो स्थायी रैन बसेरे—जिला चिकित्सालय और चंदेरिया रेलवे स्टेशन पर—साथ ही दो अस्थायी रैन बसेरे—रेलवे स्टेशन और रोडवेज बस स्टैंड पर—सर्दियों में संचालित किए जाते हैं। इन स्थायी रैन बसेरों की स्थिति चिंताजनक है। खिड़कियां और दरवाजे टूटे हुए हैं, जिससे रात में ठंडी हवाएं सीधे अंदर आती हैं। परिसर में नियमित सफाई का अभाव और गंदगी का आलम है।
सर्दी से बचाव के लिए आवश्यक गरम कंबल और बिस्तरों की भारी कमी है, जबकि पीने के पानी और शौचालय की उचित व्यवस्था भी नहीं है। कई आश्रय स्थल असामाजिक तत्वों का अड्डा बन चुके हैं, जिससे जरूरतमंद लोग इन स्थानों पर आने से हिचकिचा रहे हैं।
नगर परिषद हर वर्ष रैन बसेरों के संचालन और रखरखाव के लिए लाखों रुपये का बजट आवंटित करती है। नगर परिषद आयुक्त कृष्ण गोपाल माली ने बताया कि परिषद इनकी देखभाल पर प्रतिमाह लगभग 25 हजार रुपए खर्च करती है, लेकिन सुधार केवल सर्दियों के सीजन की शुरुआत में ही अस्थाई रूप से किया जाता है। शहर में कुल 170 आश्रितों के ठहरने की व्यवस्था है, जिसमें जिला चिकित्सालय में 44, चंदेरिया रेलवे स्टेशन पर 50, रेलवे स्टेशन अस्थायी रैन बसेरे में 25 और रोडवेज बस स्टैंड पर 50 लोग ठहर सकते हैं।
आयुक्त माली ने बताया कि कर्मचारियों के साथ बैठक कर सभी कमियों को दूर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। रेलवे स्टेशन और रोडवेज बस स्टैंड पर अस्थायी व्यवस्थाओं को जल्द पूर्ण किया जाएगा। इसमें गर्म पानी, नियमित सफाई, चिकित्सा अधिकारियों को पत्र भेजकर फर्स्ट-एड और आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता, अन्नपूर्णा रसोई के स्थान का आकलन और भोजन की व्यवस्था शामिल है। इसके साथ ही सड़कों पर सो रहे बेसहारा लोगों को निकटतम रैन बसेरों तक पहुंचाने के लिए नाइट पेट्रोलिंग भी की जाएगी।
नगर परिषद की यह पहल न केवल बेसहारा लोगों के लिए राहत का संदेश है, बल्कि शहर में सामाजिक सुरक्षा और मानवीय जिम्मेदारी की गंभीरता को भी उजागर करती है। बढ़ती सर्दी में इन रैन बसेरों के सुचारू संचालन से शहर के जरूरतमंद नागरिकों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद जताई जा रही है।
- चित्तौड़गढ़ रैन बसेरे बदहाल स्थितिChittorgarh night shelters conditionचित्तौड़गढ़ ठंड में बेसहारा लोगChittorgarh winter homeless aidनगर परिषद रैन बसेरे सुधारMunicipal night shelter maintenance Chittorgarhचित्तौड़गढ़ जिला चिकित्सालय रैन बसेराChanderiya Railway Station night shelterरोडवेज बस स्टैंड अस्थायी रैन बसेराWinter relief for homeless Chittorgarhबेसहारा लोगों के लिए सुरक्षित आश्रयChittorgarh night shelter facilitiesठंड में रैन बसेरों का संचालनChittorgarh municipal cold weather sheltersनगर परिषद सर्दी बचाव योजनाChittorgarh winter emergency shelters

Pratahkal Bureau
प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
