चित्तौड़गढ़ समाचार: तकनीकी और संस्कार के संगम से बदलेगी शिक्षा की तस्वीर, अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी ने बिनोता विद्यालय का किया औचक निरीक्षण
चित्तौड़गढ़ के अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. जितेंद्र दशोरा ने बिनोता विद्यालय का औचक निरीक्षण कर शिक्षा में तकनीक के महत्व को रेखांकित किया। डॉ. धरम अभिमन्यु ने प्रार्थना सभा को ऊर्जा का स्रोत बताया। जानें कैसे तकनीकी नवाचार और सतत मूल्यांकन से बदलेगी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बिनोता के विद्यार्थियों की किस्मत और बोर्ड परीक्षा का परिणाम।

निम्बाहेडा। आधुनिक युग में शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तकनीक और संस्कारों का एक ऐसा अनूठा मिश्रण है जो विद्यार्थी के भविष्य की नींव रखता है। इसी विजन को धरातल पर परखने के लिए चित्तौड़गढ़ के अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) डॉक्टर जितेंद्र कुमार दशोरा सोमवार को अचानक निंबाहेड़ा ब्लॉक के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बिनोता पहुंचे। उनके इस आकस्मिक दौरे ने न केवल विद्यालय प्रबंधन को सतर्क किया, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और भविष्य की योजनाओं को लेकर एक नई ऊर्जा का संचार भी किया। निरीक्षण के दौरान डॉ. दशोरा ने बुनियादी ढांचे, शिक्षक-विद्यार्थी संवाद और जिला रैंकिंग के प्रमुख बिंदुओं पर गहन मंथन करते हुए स्पष्ट किया कि आज के सूचना प्रौद्योगिकी के युग में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तकनीकी के बिना अधूरी है।
डॉ. दशोरा ने शिक्षकों को सफलता का मूल मंत्र देते हुए कहा कि "सुनकर मैं भूल जाता हूं, देख कर मुझे याद रहता है और करके मैं समझ जाता हूं।" उन्होंने जोर देकर कहा कि बोर्ड परीक्षा परिणामों में सुधार के लिए यह सूत्र रामबाण सिद्ध होगा। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे पारंपरिक रटंत प्रणाली को छोड़कर नई शिक्षण विधियों और आधुनिक तकनीक के माध्यम से नवाचार करें। निरीक्षण के दौरान उन्होंने शिक्षकों की दैनन्दिनी डायरी, विद्यालय रिकॉर्ड संधारण और शाला सौंदर्यीकरण का अवलोकन कर प्रधानाचार्य डॉक्टर हीरालाल लुहार को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उनके साथ शिक्षा विभाग के संस्थापन अधिकारी महेश कुमार सोनी, भूपेंद्र आचार्य और महेंद्र कुमार लौठ भी उपस्थित रहे, जिन्होंने प्रशासनिक बारीकियों का जायजा लिया।
इस अवसर पर शिक्षा जगत के प्रबुद्ध व्यक्तित्व और सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डॉक्टर धर्मनारायण भारद्वाज 'धरम अभिमन्यु' ने आध्यात्मिक और नैतिक पक्ष रखते हुए विद्यालय को एक 'तीर्थ' की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि विद्यालय हमारा स्वाभिमान है और यहां स्थित सरस्वती मंदिर ज्ञान, भक्ति और शक्ति का केंद्र है। डॉ. अभिमन्यु ने प्रार्थना सभा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे 'आत्मा की खुराक' बताया, जिससे विद्यार्थियों में दिनभर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। वहीं, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मंडला चारण के प्रधानाचार्य रवींद्र सिंह सिसोदिया ने सरकार की विभिन्न लाभान्वित योजनाओं और एसएनए (SNA) पोर्टल की जटिलताओं व समाधान पर विस्तार से चर्चा की।
स्थानीय विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉक्टर हीरालाल लुहार ने अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए शिक्षा के व्यावहारिक पक्ष पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि गुणात्मक शिक्षा तभी संभव है जब हम साल के अंत में परीक्षा लेने के बजाय विद्यार्थियों का सतत और रचनात्मक मूल्यांकन करें। उनके व्यवहार और सत्र पर्यंत चलने वाली गतिविधियों में उनकी भागीदारी ही उनके सर्वांगीण विकास की सच्ची कसौटी है। कार्यक्रम की शुरुआत में उप प्रधानाचार्य देवेंद्र सिंह शक्तावत और कनिष्ठ सहायक विक्रम सिंह चौहान ने आगंतुकों का आत्मीय स्वागत किया। यह दौरा केवल एक निरीक्षण मात्र नहीं था, बल्कि बिनोता के शैक्षिक परिदृश्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का एक संकल्प पत्र साबित हुआ।

Pratahkal Bureau
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