चित्तौड़गढ़ विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने आबकारी विभाग द्वारा अफीम किसानों से गत आठ वर्षों के डोडा चूरे का हिसाब मांगने की प्रक्रिया को किसानों के साथ नाइंसाफी बताते हुए सरकार से आदेश निरस्त करने और किसानों को उचित सहायता देने की मांग की है। उन्होंने शुक्रवार को विधानसभा में प्रक्रिया एवं कार्यसंचालन के नियमों के नियम 50 के अंतर्गत स्थगन प्रस्ताव पर बोलते हुए यह मुद्दा उठाया।

विधायक आक्या ने कहा कि मेवाड़ में अफीम की फसल ग्रामीण अर्थव्यवस्था की प्रमुख धुरी रही है, लेकिन हाल ही में आबकारी विभाग द्वारा डोडा चूरा नष्ट करने को लेकर जारी परिपत्र से किसानों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। विभाग की ओर से किसानों से गत 8 वर्षों के डोडा चूरे का हिसाब मांगा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अनुमान के मुताबिक अफीम के एक पट्टे पर प्रति वर्ष 60 किलो डोडा चूरे का उत्पादन होता है। ऐसे में अफीम किसानों को 8 वर्ष का डोडा चूरा नष्ट करने का फरमान जारी किया गया है। विधानसभा अध्यक्ष के माध्यम से सरकार को संबोधित करते हुए आक्या ने कहा कि पूर्व में सरकार द्वारा डोडा चूरे की खरीद की जाती थी, लेकिन विगत कुछ वर्षों से सरकार ने डोडा चूरे की खरीद नहीं की है।

आक्या ने कहा कि हर साल किसानों का डोडा चूरा नष्ट करने के लिए तौल कराने हेतु नोटिस निकाला जाता है। डोडा चूरा अधिकतम छह माह में स्वतः ही खराब हो जाता है। ऐसे में किसानों ने पुराने डोडा चूरे को अपने खेतों में डालकर खाद के रूप में इस्तेमाल कर लिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में किसान 8 साल का डोडा चूरा कहां से लाकर देगा।

विधायक ने कहा कि आबकारी विभाग के इस फरमान से अफीम किसानों के सामने अपना पट्टा निरस्त होने से बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। इस आदेश के खिलाफ चित्तौड़गढ़ में हजारों की संख्या में किसानों द्वारा धरना प्रदर्शन किया जा रहा है।

आक्या ने कहा कि हमारा किसान ईमानदार है और उसके पास 8 साल का डोडा चूरा मिलना असंभव है। उन्होंने यह भी कहा कि आबकारी विभाग के फरमान की आड़ में किसानों से अवैध वसूली की मिलीभगत की शिकायत भी सामने आ रही है।

विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने सरकार से आबकारी विभाग द्वारा जारी परिपत्र को निरस्त करने, पुराने नष्टीकरण नोटिस को खत्म करने तथा किसानों से एक हजार रुपये प्रति किलो की दर से डोडा चूरा खरीदकर उन्हें उचित सहायता देने की मांग की। विधानसभा में उठाए गए इस मुद्दे के केंद्र में अफीम किसानों से आठ वर्षों के डोडा चूरे का हिसाब मांगने की प्रक्रिया और उससे किसानों के सामने पैदा हुई चुनौती रही।

Piyush Mundara, Chittorgarh

Piyush Mundara, Chittorgarh

नाम: पियूष मूंदड़ा

वर्तमान पद: संवाददाता

कार्यक्षेत्र: चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)

अनुभव: साल 2013 से

विशेष रुचि: अपराध (क्राइम) और वन्य जीव (Wildlife) रिपोर्टिंग

बीट और कवरेज 

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शैक्षणिक योग्यता

  • स्नातक (Graduate)
  • डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)

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