चित्तौड़गढ़: मंत्रालयिक कर्मचारियों का हल्लाबोल, 14 सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
चित्तौड़गढ़ में मंत्रालयिक कर्मचारी परिषद ने 14 सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम अतिरिक्त जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपा। सहायक प्रशासनिक अधिकारी की ग्रेड पे 4200 करने, निदेशालय गठन और आरजीएचएस सुविधाओं में सुधार जैसी प्रमुख मांगों को लेकर कर्मचारियों ने हुंकार भरी है। जानें इस बड़े प्रदर्शन और भविष्य की रणनीति के बारे में पूरी जानकारी।

चित्तौड़गढ़। राजस्थान के प्रशासनिक तंत्र की रीढ़ कहे जाने वाले मंत्रालयिक कर्मचारियों ने अपनी वर्षों से लंबित मांगों को लेकर अब आर-पार की जंग का एलान कर दिया है। मंत्रालयिक कर्मचारी परिषद (भामसं) के प्रदेशव्यापी आह्वान पर गुरुवार, 22 जनवरी को चित्तौड़गढ़ की धरा पर कर्मचारियों का भारी हुजूम उमड़ा। परिषद के प्रदेश अध्यक्ष अरविन्दसिंह राव के निर्देशानुसार, जिला अध्यक्ष अंकित शर्मा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में एकत्रित हुए कर्मचारियों ने अपनी आवाज बुलंद करते हुए अतिरिक्त जिला कलक्टर रामचन्द्र खटीक को मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। यह प्रदर्शन केवल एक औपचारिक कार्यवाही नहीं, बल्कि कर्मचारियों के उस असंतोष का प्रकटीकरण था जो लंबे समय से उचित वेतनमान और पदोन्नति की विसंगतियों को लेकर पनप रहा है।
ज्ञापन में राज्य सरकार के समक्ष 14 प्रमुख मांगों का खाका पेश किया गया है, जिसमें मंत्रालयिक संवर्ग की द्वितीय पदोन्नति यानी सहायक प्रशासनिक अधिकारी के ग्रेड पे को 4200 (पे मैट्रिक्स लेवल एल-11) करने की मांग को प्राथमिकता से उठाया गया है। कर्मचारियों ने शासन व्यवस्था में सुधार के लिए संस्थापन अधिकारी के ऊपर 'उप सचिव' का नया पद सृजित करने और कनिष्ठ सहायक की शैक्षणिक योग्यता को स्नातक स्तर तक बढ़ाने की पुरजोर वकालत की है। इसके अतिरिक्त, एक स्वतंत्र निदेशालय के गठन की मांग भी जोर-शोर से उठाई गई, ताकि मंत्रालयिक कर्मचारियों की समस्याओं का त्वरित और प्रभावी निराकरण हो सके।
आर्थिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के मुद्दे पर भी ज्ञापन में कड़ा रुख अपनाया गया है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उनके उपार्जित अवकाश का नकद भुगतान करने और नई पेंशन योजना (NPS) के तहत पीएफ में जमा राशि को तत्काल हस्तांतरित करने की मांग की गई है। वहीं, आरजीएचएस योजना के तहत निजी चिकित्सालयों में कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं में आ रही बाधाओं को दूर कर पूर्ण सुविधा सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है। कर्मचारियों की एक महत्वपूर्ण मांग यह भी रही कि पदोन्नति के समय उन्हें मुख्यालय पर ही पदस्थापित किया जाए और पदोन्नति में मिलने वाली दो वर्ष की छूट की निरंतरता को बरकरार रखा जाए।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर संगठन की एकजुटता दिखाई दी। ज्ञापन सौंपने के दौरान मंत्रालयिक कर्मचारी परिषद के संरक्षक राकेश सुखवाल, जिलाध्यक्ष अंकित शर्मा और जिला मंत्री रूपकिशोर गुप्ता ने अग्रिम पंक्ति में रहकर नेतृत्व किया। उनके साथ अशोक बाहेती, दिनेश धाकड़, राकेश कुमार शर्मा, सुनील नाहर, कुंदेश शर्मा, नितेश लाड, दिलीप गर्ग और राजेश कुमार स्वामी सहित अनेक पदाधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। यह आयोजन न केवल मंत्रालयिक कर्मचारियों की एकजुटता का प्रतीक बना, बल्कि सरकार को यह स्पष्ट संदेश भी दे गया कि यदि इन न्यायोचित मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया, तो आने वाले समय में यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप धारण कर सकता है।

Pratahkal Bureau
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