चित्तौड़गढ़: नियमितीकरण की आस में थमा चिकित्सा व्यवस्था का पहिया, आर-पार की जंग के मूड में एनएचएम संविदाकर्मी
चित्तौड़गढ़ में नियमितीकरण की मांग को लेकर एनएचएम संविदा कर्मियों ने खोला मोर्चा। सामूहिक अवकाश से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन। 5 दिन का अल्टीमेटम, मांगें न मानने पर राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी। पढ़िए पूरी खबर कि क्यों अधर में लटका है 4518 कर्मियों का भविष्य।

चित्तौड़गढ़। राजस्थान के चिकित्सा विभाग की रीढ़ माने जाने वाले राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा कर्मियों के सब्र का बांध अब टूट चुका है। बरसों से 'नियमित' होने की बाट जोह रहे इन जांबाजों ने सोमवार को सामूहिक अवकाश पर जाकर सरकार के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है। चित्तौड़गढ़ में सोमवार को स्वास्थ्य सेवाओं की गति तब थम गई जब एनएचएम प्रबंधन संवर्ग के कार्मिक अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए। यह केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों की पीड़ा का हुंकार है जो 'राजस्थान कांट्रेक्चुअल हायरिंग टू सिविल पोस्ट रूल्स 2022' की फाइलों में दबे अपने भविष्य को सुरक्षित करने की गुहार लगा रहे हैं।
एनएचएम मैनेजमेंट संवर्ग के अध्यक्ष राहुल जैन ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए बताया कि प्रदेश में 4518 पदों के लिए नियमितीकरण की संपूर्ण प्रक्रिया चिकित्सा विभाग द्वारा पूरी कर ली गई है, लेकिन इसके बावजूद पात्र कार्मिकों को आज तक लाभ से वंचित रखा गया है। विडंबना यह है कि सीएसआर रूल्स लागू होने के बाद कई साथियों की असामायिक मृत्यु हो गई, लेकिन उनके पीछे छूटे परिवारों को कोई आर्थिक संबल या परिलाभ नहीं मिला। तीन साल का लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी एक भी प्रबंधकीय संविदा कर्मचारी को नियमित नहीं किया जाना प्रशासन की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सामाजिक सुरक्षा के अभाव में जी रहे इन कार्मिकों का दर्द तब और बढ़ जाता है जब वे चिकित्सा विभाग का हिस्सा होने के बावजूद आरजीएचएस (RGHS) जैसी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लाभ से भी महरूम रहते हैं। व्यवस्था से त्रस्त होकर जिले के तमाम खंड और जिला मुख्यालयों पर कार्यरत एनएचएम कार्मिकों ने मुख्यमंत्री के नाम उपखंड अधिकारी और अतिरिक्त जिला कलेक्टर (प्रशासन) को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान राजाराम जाट, खुशवंत कुमार हिण्डोनिया, नारायण बुनकर, राजेश अजमेरा, शंकर वैष्णव, राकेश शर्मा और अनिल सैनी सहित भारी संख्या में संविदाकर्मी मौजूद रहे।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अगले 5 दिनों के भीतर उनकी जायज मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे राज्यव्यापी आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि सरकार इन 'कोरोना वारियर्स' और स्वास्थ्य सेवाओं के सारथियों की जायज मांगों पर कब तक संज्ञान लेती है, या फिर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को बड़े आंदोलन की आग में झोंक दिया जाएगा।

Praveen Mehta, Dungla
नाम: प्रवीण मेहता
वर्तमान पद: संवाददाता (प्रातकाल)
कार्यक्षेत्र: डूंगला उपखंड, जिला चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): प्रशासन, शिक्षा, और राजनीति
परिचय
प्रवीण मेहता राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के अंतर्गत आने वाले डूंगला उपखंड क्षेत्र के संवाददाता हैं। वह मुख्य रूप से प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा व्यवस्था, स्थानीय राजनीति, घटना-दुर्घटना और जनहित से जुड़े कार्यों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाना, ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को इन योजनाओं से जोड़ना और सामाजिक सरोकार के मुद्दों को निष्पक्षता से उठाना है।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
प्रवीण मेहता को प्रिंट और डिजिटल मीडिया में दो दशकों से अधिक का व्यापक अनुभव है। उनके करियर का विवरण निम्नलिखित है:
- जय राजस्थान, मेवाड़ी मीरा, और जननायक: वर्ष 2002 में इन समाचार पत्रों में कार्य किया।
- दैनिक दशपुर एक्सप्रेस: वर्ष 2006 से लगातार 12 वर्षों तक इस समाचार पत्र में अपनी सेवाएं दीं।
- दैनिक भास्कर: वर्ष 2008 से 2012 तक संवाददाता और एजेंसी के रूप में कार्य किया।
- प्रातकाल: वर्ष 2018 से वर्तमान तक लगातार 'प्रातकाल' समाचार पत्र के संवाददाता के रूप में डूंगला क्षेत्र में कार्यरत हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी शिक्षा 10वीं कक्षा तक पूरी की है।
