भीषण गर्मी और तपते सूरज के बीच जब राहगीर प्यास से व्याकुल थे, तब चित्तौड़गढ़ में मानवता की एक सुखद तस्वीर देखने को मिली। निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर माली समाज ने एक पुनीत पहल करते हुए राहगीरों को शीतल मिल्करोज वितरित कर उन्हें चिलचिलाती गर्मी से राहत प्रदान की। यह सेवा कार्य न केवल प्यास बुझाने का माध्यम बना, बल्कि समाज में एकजुटता और परोपकार की मिसाल भी पेश की।

नगर के पावटा चौक स्थित महात्मा ज्योतिबा फूले सर्किल पर आयोजित इस सेवा कार्यक्रम की कमान हेमराज माली ने संभाली। इस अवसर पर लगभग एक क्विंटल दूध से तैयार किया गया मिल्करोज राहगीरों और आमजन को समर्पित किया गया। भीषण गर्मी की परवाह किए बिना समाज के लोगों ने पूरे उत्साह के साथ राहगीरों को ठंडे मिल्करोज का वितरण किया, जिससे तपती दोपहर में गुजर रहे लोगों को काफी राहत मिली।

इस सेवा अनुष्ठान में माली समाज के प्रमुख पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। संस्थान के प्रमुख किशन दगदी, शिवशंकर धुवारिया, हरलाल गोयल, बालकिशन, कन्हैयालाल, रतनलाल दगदी, दुर्गेश माली, आशीष दगदी, राहुल माली, कमलेश मास्टर, पवन माली, दिनेश माली, प्रीतम माली और चुन्नीलाल माली सहित समाज के अनेक सदस्य इस आयोजन को सफल बनाने के लिए उपस्थित रहे। समाज के इन प्रबुद्धजनों ने अपनी सक्रिय भागीदारी से एक ओर जहां आयोजन को व्यवस्थित रूप दिया, वहीं दूसरी ओर सामाजिक समरसता और निस्वार्थ सेवा का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।

यह आयोजन केवल एक धार्मिक पर्व का हिस्सा नहीं था, बल्कि यह समाज के उन मूल्यों का प्रतिबिंब था जो जरूरतमंदों की सहायता और जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। निर्जला एकादशी के दिन किए गए इस सेवा कार्य ने चित्तौड़गढ़ की गलियों में एक सकारात्मक संदेश फैलाया है, जो यह दर्शाता है कि सेवा का मार्ग ही सबसे बड़ा धर्म है। समाज के लोगों द्वारा किया गया यह प्रयास निस्संदेह भीषण गर्मी में राहगीरों के लिए एक बड़ी राहत बनकर उभरा।

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