महेश नवमी के उपलक्ष्य में चित्तौड़गढ़ में आयोजित चौथी शतरंज चैंपियनशिप में खिलाड़ियों का जोश देखते ही बन रहा है। बौद्धिक द्वंद और रणनीतियों के इस महाकुंभ में कौन बनेगा विजेता? देखिए चित्तौड़गढ़ के शतरंज पटल पर बिछी जीत की बिसात की पूरी रिपोर्ट।

महेश नवमी के पावन अवसर पर प्रतापनगर स्थित माहेश्वरी भवन में बुद्धि के खेल का रोमांच अपने चरम पर है, जहाँ माहेश्वरी समाज द्वारा आयोजित दो दिवसीय 'चतुर्थ शतरंज चैंपियनशिप' का भव्य शुभारंभ हुआ। स्व. शंकरलाल कोठारी की स्मृति में कोठारी परिवार के मुख्य प्रायोजन और महेश वेलफेयर सोसाइटी के तत्वावधान में आयोजित यह प्रतियोगिता न केवल खिलाड़ियों के लिए एक मंच है, बल्कि समाज में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने का एक सशक्त माध्यम भी बनकर उभरी है। प्रतियोगिता का उद्घाटन मुख्य अतिथि अशोक अजमेरा, अध्यक्षता कर रहे डॉ. राधेश्याम लढ्ढा और मुख्य प्रायोजक गजेंद्र कोठारी की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। भगवान महेश और मां सरस्वती के चरणों में दीप प्रज्ज्वलन और नन्हे खिलाड़ियों द्वारा शतरंज की पहली चाल चलने के साथ ही प्रतिस्पर्धा का शंखनाद किया गया।

प्रतियोगिता का आयोजन जिला शतरंज संघ और चित्तौड़ चेस किंग अकादमी के तकनीकी सहयोग से किया गया है, जिसमें स्विस सिस्टम और फिड़े (FIDE) के अंतरराष्ट्रीय नियमों का पूर्णतः पालन सुनिश्चित किया गया है। यह टूर्नामेंट अंडर-9, 13, 19 के बालक-बालिका वर्ग और सीनियर महिला-पुरुष वर्ग सहित कुल पांच श्रेणियों में आयोजित हो रहा है। प्रतियोगिता के पहले दिन तीन चुनौतीपूर्ण राउंड संपन्न हुए, जिनमें कड़ा मुकाबला देखने को मिला। अंडर-9 में अर्थ सोनी, विराज माधव ईनाणी, मिशिका भराडिया और वंशिका काबरा ने अपनी पकड़ मजबूत की है। वहीं, अंडर-13 में हिमांक चेचानी, कुशाग्र मुंदड़ा, प्रिशा माहेश्वरी और भाग्यश्री कोठारी ने शानदार प्रदर्शन किया है। अंडर-19 और सीनियर वर्गों में भी शिवम ईनाणी, अथर्व आगाल, अक्षरा और अक्षिता समदानी, अनुज ईनाणी तथा भरत सोमानी के बीच कांटे की टक्कर बनी हुई है।

इस गौरवमयी आयोजन में अतिथियों का स्वागत समाज के युवाओं और पदाधिकारियों द्वारा किया गया। खेल का यह महाकुंभ न केवल समाज के भीतर आपसी भाईचारे को सुदृढ़ कर रहा है, बल्कि युवाओं में रणनीतिक सोच और बौद्धिक कौशल का संचार भी कर रहा है। रविवार को खेले जाने वाले अंतिम दो निर्णायक राउंड यह तय करेंगे कि इस चौथी चैंपियनशिप के विजेता कौन होंगे, लेकिन इस आयोजन ने चित्तौड़गढ़ में शतरंज के खेल को एक नई पहचान और प्रेरणा दी है, जो निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी।

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