चित्तौड़गढ़ में महाराणा प्रताप जयंती पर चतुर्थ दंगल का भव्य आयोजन, पहलवानों ने दिखाया दम
चित्तौड़गढ़ में महाराणा प्रताप जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित चतुर्थ दंगल में 120 पहलवानों ने अपना दमखम दिखाया। उदयपुर संभाग के केसरी खिताब से लेकर विभिन्न भार वर्गों में रोमांचक मुकाबले देखने को मिले, जानिए कौन बना विजेता।

चित्तौड़गढ़ में महाराणा प्रताप जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित चतुर्थ दंगल के समापन समारोह के दौरान विजेता पहलवानों को सम्मानित करते अतिथि और आयोजन समिति के सदस्य।
महाराणा प्रताप जयंती के पावन अवसर पर परंपरा और शौर्य का अनूठा संगम देखने को मिला, जब बालाजी प्रशिक्षण संस्थान द्वारा आयोजित चतुर्थ दंगल का भव्य समापन हुआ। वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के शौर्य को नमन करते हुए आयोजित इस प्रतियोगिता में चित्तौड़गढ़, उदयपुर और प्रतापगढ़ जिलों के 120 महिला व पुरुष पहलवानों ने अपनी शारीरिक शक्ति और कुश्ती कौशल का अद्भुत प्रदर्शन किया। इस आयोजन ने न केवल स्थानीय स्तर पर खेल प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया, बल्कि पारंपरिक भारतीय कुश्ती के प्रति युवाओं के उत्साह को भी नई ऊर्जा दी।
कार्यक्रम का शुभारंभ श्रवणसिंह राव और सुरेश झंवर के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ, जबकि अध्यक्षता अनिल ईनाणी ने की। दंगल के दौरान विशेष अतिथियों में प्रतापगढ़ जिला कुश्ती संघ के सचिव उस्ताद जगदीश साहु सहित शहर के अनेक गणमान्य नागरिक और खेल प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन बसंतीलाल पंचोली ने किया। व्यायामशाला के कुश्ती प्रशिक्षक विजय गांछा ने बताया कि दंगल में पहलवानों का प्रदर्शन अत्यंत सराहनीय रहा। अतिथियों द्वारा स्थानीय पहलवानों और उस्तादों के आग्रह को स्वीकार करते हुए व्यायामशाला के लिए आधुनिक कुश्ती मेट उपलब्ध कराने की घोषणा की गई, जो भविष्य में खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।
प्रतियोगिता के विभिन्न वर्गों में हुए कड़े मुकाबले आकर्षण का केंद्र रहे। उदयपुर संभाग प्रताप केसरी का खिताब नरेन्द्र गुर्जर ने जीता, जबकि प्रताप कुमार वर्ग में राहुल गुर्जर प्रथम रहे। वहीं, पन्नाधाय केसरी का खिताब माही ओड़ ने अपने नाम किया। इसके अतिरिक्त, पुरुष वर्ग के 30 किग्रा से लेकर 60 किग्रा भार वर्ग तथा महिला वर्ग के 30 किग्रा से 45 किग्रा भार वर्ग में भी अनेक उभरते पहलवानों ने स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक हासिल किए। विजेता पहलवानों को केसरिया पट्टा, गुर्ज, ममेंटो और नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। निर्णायक मंडल में हेमंत हठवाल, हरीश यादव, जगपाल सिंह राणावत, विजय गांछा और लोकेश गुर्जर ने अपनी निष्पक्ष सेवाएं दीं।
यह आयोजन केवल एक खेल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने महाराणा प्रताप के स्वाभिमान और त्याग की गौरवशाली गाथा को युवाओं के दिलों में फिर से जीवंत कर दिया। खेल और अनुशासन के माध्यम से भविष्य के श्रेष्ठ खिलाड़ी तैयार करने की दिशा में बालाजी प्रशिक्षण संस्थान का यह प्रयास स्थानीय खेल संस्कृति को सशक्त बनाने में एक मिल का पत्थर साबित हुआ है।

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