चित्तौड़गढ़: महामंडलेश्वर उत्तम स्वामी महाराज का विद्या निकेतन में आगमन, छात्रों को दिया सफलता का 'चतुष्कोणीय' मंत्र
चित्तौड़गढ़ के विद्या निकेतन विद्यालय में महामंडलेश्वर संत उत्तम स्वामी महाराज का प्रवास रहा। उन्होंने छात्रों को भौतिकता त्याग कर विद्या अध्ययन और चार पुरुषार्थों को अपनाने का संदेश दिया। इस भव्य कार्यक्रम में डॉ. सुशीला लढ्ढा सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। शिक्षा और अध्यात्म के इस संगम की पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

चित्तौड़गढ़। मेवाड़ की पावन धरा पर आध्यात्मिक तेज और शिक्षा के संगम का एक अनूठा दृश्य उस समय जीवंत हो उठा, जब विद्या भारती की योजना के अंतर्गत गांधीनगर स्थित विद्या निकेतन उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रांगण में महामंडलेश्वर संत शिरोमणि उत्तम स्वामी महाराज का मंगलमय प्रवास हुआ। संतों की उपस्थिति से न केवल विद्यालय का वातावरण भक्तिमय हो गया, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन के गूढ़ रहस्यों और पुरुषार्थ के वास्तविक अर्थ को समझने का सुअवसर प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ संत श्री के सानिध्य में माँ भारती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसने ज्ञान के प्रकाश की लौ को और प्रज्वलित कर दिया।
संस्थान की परंपरा के अनुसार अतिथियों का भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर संस्थान की उपाध्यक्षा डॉ. सुशीला लढ्ढा, ज्ञान मेहता, धर्मनारायण भारद्वाज, जगदीश टेलर, सत्यनारायण लक्षकार, बालू दास वैष्णव, सुनील कुमार राठी, वंदना वजीरानी एवं सदस्य प्रेमलता मंहत ने संत श्री का भावभीनी अगवानी की। जिला सचिव कैलाश चन्द्र शर्मा ने संत श्री का परिचय करवाते हुए उनके जीवन और आध्यात्मिक यात्रा पर प्रकाश डाला। औपचारिकताओं के पश्चात महाराज श्री ने विद्यालय की दैनिक वंदना सभा में भाग लिया और माधव छात्रावास की व्यवस्थाओं, वहां संचालित होने वाले विभिन्न क्रियाकलापों तथा शैक्षणिक गतिविधियों का सूक्ष्मता से अवलोकन किया। उन्होंने विद्यालय के अनुशासन और सेवा भाव की मुक्त कंठ से सराहना की।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उत्तम स्वामी महाराज ने एक अत्यंत प्रेरणादायी और ओजस्वी उद्बोधन दिया। उन्होंने जीवन के सर्वोच्च शिखर पर पहुँचने के लिए 'चार पुरुषार्थ' की महत्ता को रेखांकित किया। महाराज ने कहा कि एक विद्यार्थी के जीवन का एकमात्र और सर्वोपरि लक्ष्य 'विद्या अर्जन' होना चाहिए। उन्होंने वर्तमान समय की विलासिता और भौतिक सुख-सुविधाओं के मोह को शिक्षा के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि बालक भौतिक संसाधनों के मोह का त्याग कर अपनी पूरी ऊर्जा केवल स्वाध्याय और ज्ञानार्जन में लगाए, तो उसे संसार की कोई भी शक्ति सफल होने से नहीं रोक सकती।
इस गरिमामय आयोजन के दौरान प्रवीण टांक और राजन माली सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और भक्तजन उपस्थित रहे, जो संत के वचनों का लाभ उठाने पहुंचे थे। कार्यक्रम के समापन पर बालिका विद्यालय की प्रधानाचार्या ललिता राठौड़ ने सभी आगंतुकों और अतिथियों का हृदय से आभार व्यक्त किया। यह आयोजन केवल एक प्रवास मात्र नहीं था, बल्कि चित्तौड़गढ़ के विद्यार्थियों के लिए एक ऐसी वैचारिक यात्रा थी, जो उन्हें भविष्य में राष्ट्र निर्माण के लिए तैयार करने का संकल्प दे गई।

Pratahkal Newsroom
प्रातःकाल न्यूज़-रूम, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, समयबद्ध और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा न्यूज़-रूम राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
