चित्तौड़गढ़ में 'खेत बचाओ अभियान' और किसान सम्मान निधि कार्यक्रम का सफल आयोजन
चित्तौड़गढ़ में आयोजित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाइव प्रसारण देखा। 'खेत बचाओ अभियान' के जरिए आधुनिक और प्राकृतिक खेती को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने का संकल्प लिया गया। क्या किसान अब आधुनिक नवाचारों से बदलेंगे खेती का भविष्य?

चित्तौड़गढ़ स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान मौजूद किसान और कृषि अधिकारी।
चित्तौड़गढ़ की धरती पर शनिवार को कृषि जगत में नवाचार और आधुनिकता का एक नया अध्याय लिखा गया। कृषि विज्ञान केंद्र के तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत आयोजित इस विशेष सत्र ने न केवल किसानों को नई तकनीक से परिचित कराया, बल्कि उन्हें प्राकृतिक खेती की ओर अग्रसर होने के लिए प्रेरित भी किया। इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पश्चिम बंगाल के तारकेश्वर, हुगली से प्रसारित प्रधानमंत्री का लाइव टेलीकास्ट रहा, जिसे जिले के 120 प्रगतिशील कृषकों और महिला किसानों ने एक साथ देखा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनय पाठक ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की महत्ता को रेखांकित करते हुए किसानों से आह्वान किया कि वे खेती में आधुनिक तकनीकों को अपनाएं। उन्होंने नवाचारों के माध्यम से कृषि आय में वृद्धि करने पर जोर देते हुए उपस्थित युवाओं और कृषकों को प्राकृतिक खेती के विभिन्न आयामों से अवगत कराया। उनका मानना है कि पारंपरिक खेती की जगह जब आधुनिक और प्राकृतिक तरीकों का समावेश होगा, तभी कृषि क्षेत्र में वास्तविक क्रांति आएगी।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. रतन लाल सोलंकी ने 'खेत बचाओ अभियान' की बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए इसे वर्तमान समय की बड़ी आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि जैविक खेती को अपनाना न केवल जमीन की उर्वरक शक्ति को संरक्षित करेगा, बल्कि जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा में भी मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसान जैविक उत्पादों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो उन्हें बाजार में उचित मूल्य प्राप्त होगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और समृद्ध होगी।
कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. शंकर लाल जाट ने विभाग द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का विस्तृत विवरण दिया। उन्होंने प्राकृतिक खेती मिशन एवं परम्परागत कृषि विकास योजना के महत्व पर चर्चा करते हुए किसानों को इन सरकारी योजनाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में नोडल अधिकारी नाना लाल चावला, डॉ. हरीश टांक, मुकेश आमेटा, सरोज कुमार मिश्रा और देवेन्द्र पालीवाल सहित कृषि विभाग एवं केंद्र के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। यह आयोजन न केवल तकनीकी हस्तांतरण का माध्यम बना, बल्कि किसानों में अपनी माटी और खेती के प्रति एक नई चेतना जागृत कर गया, जो आने वाले समय में चित्तौड़गढ़ के कृषि परिदृश्य को एक नई दिशा प्रदान करेगा।

Pratahkal Hub
प्रातःकाल हब, दै.प्रातःकाल की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रातःकाल हब राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।"
