श्री शेषावतार कल्ला जी वेदपीठ के 21वें महाकुंभ के प्रथम दिवस पर निकाली गई शोभा यात्रा में विभिन्न झांकियों और सांस्कृतिक प्रदर्शनों ने आकर्षित किया।

मेवाड़ की ऐतिहासिक धरा पर श्री शेषावतार कल्ला जी वेदपीठ के 21वें कल्याण महाकुंभ का प्रथम दिवस बुधवार को आषाढ़ कृष्णा प्रतिपदा के पावन अवसर पर एक अद्वितीय और अविस्मरणीय इतिहास रच गया। दशहरा मैदान स्थित ढाबेश्वर महादेव मंदिर से प्रारंभ हुई भव्य शोभा यात्रा और कलश यात्रा में जनमानस का ऐसा सैलाब उमड़ा कि पूरी कल्याण नगरी भक्ति की अविरल गंगा में निमग्न नजर आई। अलसुबह से ही नगर और सुदूरवर्ती अंचलों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं के आगमन से समूचा वातावरण शिवमय हो गया और भक्ति का यह दृश्य वर्षों तक स्मृतियों में अंकित रहने वाला बन गया।

शोभा यात्रा की भव्यता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि इसमें मुंबई के 40 कलाकारों के 'ए एस ढोल पुनेरी पथक' के आकर्षक प्रदर्शन के साथ 11 बैंड, 21 मालवीय ढोल, 51 अश्व, 31 ऊंट और 11 ऊंट गाड़ियों ने चार चांद लगा दिए। 250 से अधिक गांवों की प्रभात फेरियों, केसरिया बाना पहने वीर-वीरांगनाओं और कृष्णा शक्ति दल की मातृशक्ति की सहभागिता ने इसे एक विराट धार्मिक समागम का स्वरूप प्रदान किया। श्री कल्ला जी वैदिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. महेश दीक्षित के निर्देशन में योग और आयुर्वेद पर आधारित झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं, वहीं द्वादश ज्योतिर्लिंग, एकादश रुद्रावतार और भारत माता की झांकियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। शोभा यात्रा के दौरान रतलाम के जितेन्द्र धुलिया के नेतृत्व में नन्हीं बालिकाओं द्वारा क्रेन के माध्यम से किया गया मलखंभ प्रदर्शन और बजरंग व्यायामशाला के युवाओं का अखाड़ा प्रदर्शन साहस और शौर्य का प्रतीक बनकर उभरा।

नगरवासियों ने इस ऐतिहासिक शोभा यात्रा का पग-पग पर पुष्प वर्षा और भव्य स्वागत के साथ अभिनंदन किया। लगभग 5 किलोमीटर लंबे मार्ग पर घरों की छतों से लेकर सड़कों तक जनसमूह ठाकुर जी की एक झलक पाने के लिए लालायित दिखा। इस अवसर पर भाजपा के अशोक नवलखा, कपिल चौधरी, गब्बर अहीर, पूर्व मंत्री उदय लाल आंजना सहित अनेक जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों और नगर परिषद आयुक्त कौशल कुमार खटुमरा के नेतृत्व में परिषद कर्मियों ने ठाकुर जी की अगवानी की। मंडी चौराहे पर क्षेत्रपाल की पूजा और महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर महाकुंभ की सफलता की कामना की गई। बजरंग व्यायामशाला द्वारा प्रस्तुत वीर जयमल-कल्ला के युद्ध का सजीव चित्रण दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जिसने इतिहास के गौरवशाली पन्नों को जीवंत कर दिया।

वेदपीठ प्रांगण मोगरे के फूलों की महक से सुवासित हो उठा, जहां ठाकुर जी सहित पंच देवों का 21 द्रव्यों से महारुद्राभिषेक किया गया। भानपुरा पीठ के शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ ने श्रीलिंग महापुराण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस महाकुंभ के माध्यम से कल्याण नगरी को 'छोटी काशी' के रूप में प्रतिष्ठित करने का प्रयास अनुकरणीय है। व्यास पीठ से उन्होंने ठाकुर जी के स्वरूप की सराहना करते हुए इस आयोजन को शिव आराधना का महासमर बताया। समापन की ओर अग्रसर इस भव्य आयोजन ने न केवल धार्मिक चेतना का संचार किया, बल्कि मेवाड़ की सांस्कृतिक धरोहर को एक नई ऊंचाई प्रदान की है।

Updated On 1 July 2026 7:37 PM IST
Pratahkal Hub

Pratahkal Hub

प्रातःकाल हब, दै.प्रातःकाल की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रातःकाल हब राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।"

Next Story