चित्तौड़गढ़: श्री शेषावतार कल्लाजी वेदपीठ में भव्य फागोत्सव ने रचा इतिहास
फाल्गुन शुक्ला पूर्णिमा पर आयोजित इस उत्सव में हजारों श्रद्धालुओं ने 51 प्रकार के फूलों और प्राकृतिक रंगों के साथ ठाकुर जी के संग होली खेली।

चित्तौड़गढ़ के श्री शेषावतार कल्लाजी वेदपीठ में आयोजित फागोत्सव के दौरान ठाकुर जी को पुष्प और अबीर अर्पित कर होली मनाते श्रद्धालु।
चित्तौड़गढ़। मेवाड़ के प्रसिद्ध श्री शेषावतार कल्लाजी वेदपीठ की ओर से अपनी परंपरा अनुसार होलिका दहन के द्वितीय दिवस फाल्गुन शुक्ला पूर्णिमा को आयोजित भव्य फागोत्सव ने कल्यानगरी में नया इतिहास रचा। इस मौके पर मंदिर परिसर में आयोजित फागोत्सव ने बृज की होली की अनुभूति कराते हुए हजारों कल्याण भक्तों को सतरंगी अबीर गुलाल और 51 प्रकार के फूलों से खेली गई होली से ऐसा रंग जमा मानो भक्त और भगवान एकाकार हो गए हो।
भजन गायकों की स्वर लहरियों से भक्ति रस में डूबी कल्यानगरी
इस मौके पर ठाकुर जी को 56 भोग की तरह नानाविध प्रकार के अबीर, गुलाल, पुष्प एवं इत्र न्यौछावर किए गए। जब प्रसिद्ध भजन गायक मुख्य रसिया गायन सरवानिया भीलवाड़ा की सुप्रसिद्ध गायिका दीप दाधीच, कल्याणनगरी से अखिलेश ठाकुर, हनुमान प्रसाद शर्मा एवं साथियों द्वारा फाल्गुनी रसिया की तर्ज पर ठाकुर जी का आह्वान किया गया, तो उन्होंने अपने ही अंदाज में "होली खेलो तो कल्लाजी वेदपीठ आइजो जी" सुनाकर वातावरण को भक्ति रस से सराबोर कर दिया।
प्राकृतिक रंगों और पुष्प वर्षा के बीच झूम उठे श्रद्धालु
इस बीच हजारों भक्तों ने अपने आराध्य को अबीर, गुलाल के साथ प्राकृतिक पलाश के फूलों के रंग से सराबोर करने के साथ ही ठाकुर जी की ओर से भी भक्तों पर जब पुष्प और गुलाल की वर्षा की गई, तो मनोहारी दृश्य देखते ही बनता था। इस बीच गायकों ने "होलिया में उड़े रे गुलाल कल्लाजी थारा मन्दिर में" भक्तों को सुनाकर भक्तों को नृत्य करने के लिए विवश कर दिया। हर कोई भक्त अपने ही अंदाज में होली मनाने अपने आराध्य से सच्ची श्रद्धा भावना से जुड़कर कल्याण के रंग में रंगने को विवश हो गया।
तीन घंटे चली मस्ती और रिकॉर्ड तोड़ जन-सहभागिता
लगभग 3 घंटे चले फागोत्सव के दौरान भक्तों की मौज मस्ती देखने योग्य थी। हर भक्त ठाकुर जी के रंग में रंग कर स्वयं को धन्य महसूस कर रहा था। फागोत्सव के पश्चात समस्त भक्तों को वेदपीठ की ओर से प्रसाद वितरण किया गया। फागोत्सव के इस भव्य आयोजन में वेदपीठ के आचार्याे, बटुकों, पदाधिकारियों, वीर-वीरांगनाओं, कृष्णा शक्तिदल की माता बहनों, शक्ति दल की बालिकाओं, कल्यानगरीवासियों सहित आसपास के गांवों एवं हजारों कल्याण भक्तों ने सहभागिता निभाते हुए पिछले कई वर्षों के फागोत्सव के रिकॉर्ड को तोड़कर नया इतिहास रच दिया।

