चित्तौड़गढ़ स्थित मेवाड़ के प्रसिद्ध श्री शेषावतार कल्ला जी वेदपीठ पर आयोजित 21वें कल्याण महाकुंभ के छठे दिन सोमवार को ठाकुर श्री कल्लाजी के खाटू नरेश श्याम बाबा स्वरूप के दर्शन कर भक्त और श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। सतरंगी फूलों से सजी मनमोहक झांकी के बीच ठाकुर जी सहित पंच देवों के अनुपम श्रृंगार ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर श्याम बाबा को 101 थाल में मोहन भोग का न्योछावर किया गया, जिससे समूचा वातावरण श्याममय हो गया। श्रद्धालुओं ने कहा कि ऐसे अद्भुत ठाठ केवल कल्ला जी वेदपीठ पर ही देखने को मिलते हैं।

महाकुंभ के अंतर्गत नेमीशारण्य परिसर स्थित यज्ञशाला में चल रहे 51 कुण्डीय श्री अतिरुद्र महायज्ञ के तीसरे दिन सोमवार को 300 से अधिक युगल यजमानों ने गो घृत एवं शाकल्य से आहुतियां देकर ब्रह्मांड के कल्याण और वर्षा की कामना की। पिछले तीन दिनों में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच लगभग ढाई करोड़ आहुतियां दी जा चुकी हैं। इसी क्रम में भगवान शिव के एकादश रुद्रों की पूजा के लिए यज्ञ शाला के मुख्य कुंड पर वेद विद्यालय के 11 बटुकों को रुद्र रूप में विराजित कर वेदपीठ के न्यासी एवं पदाधिकारियों ने विधिवत पूजा अर्चना की। साथ ही, पुरुष यजमानों को 10 विधि हेमाद्रि स्नान कराया गया, जिससे गंगा तट जैसी अनुभूति हुई।

पंचम दिवस के आयोजनों के तहत रविवार रात्रि को कथा मंडप में अखिलेश ठाकुर और जीतू धोरा सहित अन्य भजन गायकों ने श्याम बाबा के भजनों की प्रस्तुति दी। मुकेश राजपुरोहित ने सियाराम जी का डंका और बजरंग बाला ने शिव भक्ति से ओत-प्रोत भजनों से भक्तों को आनंदित किया। वहीं, अखिलेश ठाकुर और जीतू धोरा ने उज्जैन वाले महाकाल सहित कई भजनों की प्रस्तुति दी, जिस पर वेदपीठ की वीरांगनाओं ने नृत्य किया। इस दौरान वेदपीठ की ओर से गायकों का सम्मान भी किया गया। महाकुंभ के सातवें दिन मंगलवार को संध्या महाआरती के बाद मारवाड़ के प्रसिद्ध भजन गायक महावीर सांखला एवं साथी भजन संध्या प्रस्तुत करेंगे।

विश्व रूपम कथा मंडपम में भानपुरा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ महाराज ने श्री लिंग महापुराण कथा के छठे दिन भगवान शिव को अनादि, अनंत, स्वयंभू और सर्वव्यापी परमात्मा बताया। उन्होंने कहा कि शिव और शिवा (पार्वती) अभिन्न हैं और सृष्टि का संचालन शिव की इच्छा से होता है। शंकराचार्य ने शिव और शक्ति के अद्वैत स्वरूप का वर्णन करते हुए कहा कि समस्त जीव भगवान शिव से ही उत्पन्न होकर अंततः उन्हीं में विलीन हो जाते हैं, यही लिंग महापुराण का मूल संदेश है।

Pratahkal Newsroom

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