चित्तौड़गढ़, राजस्थान में सकल जैन समाज द्वारा सोमवार को एक मौन जुलूस निकालकर आर्यिका 105 श्रुतमती माताजी एवं आर्यिका 105 उपशम मति माताजी के असामयिक देवलोकगमन के प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई। आचार्य भगवन 108 विद्यासागर जी महामुनिराज की शिष्या इन दोनों आर्यिकाओं का 20 मई को रीवा शहर, मध्यप्रदेश में एक सड़क हादसे में निधन हो गया था। यह घटना एक कार चालक द्वारा अंजाम दी गई बताई गई है, जबकि घटना स्थल के वीडियो फुटेज एवं उपस्थित साक्ष्यों के आधार पर इसे एक सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा प्रतीत होने की बात भी सामने रखी गई है।

सकल जैन समाज ने इस पूरे प्रकरण को गंभीर बताते हुए स्पष्ट किया कि जैन साधु-संत पूर्णतः निहत्थे, अहिंसक एवं पैदल विहार करने वाले तपस्वी होते हैं, जो किसी प्रकार की सुरक्षा या भौतिक सुविधाओं का उपयोग नहीं करते और समाज में शांति, संयम, करुणा एवं अहिंसा का संदेश प्रसारित करते हैं। ऐसे संतों के साथ बढ़ती दुर्घटनाएँ एवं हमले समाज के लिए अत्यंत चिंता का विषय हैं।

इसी क्रम में सकल जैन समाज द्वारा सुभाष चौक से कलेक्ट्रेट चौराहा तक मौन जुलूस निकाला गया और जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में घटना की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच कराने, एसआईटी अथवा न्यायिक जांच कराए जाने, घटना से संबंधित सभी फुटेज, वीडियो एवं डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने, दोषियों पर कठोरतम कानूनी कार्रवाई करने तथा यदि सुनियोजित कृत्य या षड्यंत्र के तथ्य प्राप्त हों तो तदनुसार कठोर धाराएँ लगाने की मांग की गई।

इसके साथ ही संत सुरक्षा प्रोटोकॉल तत्काल लागू करने, विहार मार्गों पर प्रशासनिक समन्वय, संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस सहयोग, ट्रैफिक नियंत्रण एवं चेतावनी संकेतक, हाईवे एवं भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने, राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति बनाने, पैदल विहार करने वाले संतों हेतु राष्ट्रीय गाइड लाइन एवं सुरक्षा व्यवस्था लागू करने, संवेदनशील मांगों हेतु विशेष प्रावधान निर्मित करने, संतों के विरुद्ध अपराधों को विशेष संवेदनशील श्रेणी में रखने तथा प्रशासन एवं समाज के बीच समन्वय तंत्र स्थापित करने की मांग भी रखी गई।

यह मौन जुलूस महावीर जैन मंडल एवं सकल दिगम्बर जैन समाज के तत्वावधान में आयोजित किया गया। इसमें डॉ. ज्ञानसागर जैन सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। उपस्थित व्यक्तियों में राजेन्द्र दोशी, सोहनलाल पोखरना, नवीन पटवारी, किरण डांगी, शंकर सुराणा, सुरेश लोडा, सावरमल बोरिया, चांदमल बोकड़िया, सुरेश सिंघवी, दिनेश पटवारी, बलवंत बाघमार, राजकुमार बज, रजनीश खाब्या, नवनीत मोदी, डॉ आई.एम. सेठिया, नरेन्द्र चोरड़िया, रोशन लोडा, पवन पटवारी, नरेन्द्र पोखरना, सुधीर जैन, अशोक सेठिया, राजेन्द्र गोधा, राजकुमार गदिया, राजेन्द्र पाटनी, महावीर वेद, राजेन्द्र प्रसाद जैन, दिलीप सोगानी, नवीन घनश्याम जैन, महावीर रमावत, संजय कुमार वेद, रमेश अजमेरा, ओमप्रकाश गदिया, ओमप्रकाश अजमेरा, बसंतीलाल वेद, घीसुलाल बड़जात्या, डॉ. नेमीचन्द्र अग्रवाल, हेमेन्द्र टोंग्या, मुकेश सोगानी, अंकुर चौधरी, मनोज पाटनी, नवीन पाटनी, मंजु सेठी, मनोरमा अजमेरा शामिल रहे।

यह पूरा प्रकरण जैन समाज की भावनाओं से जुड़ा होने के कारण क्षेत्र में गंभीर चिंता और प्रशासनिक स्तर पर त्वरित एवं पारदर्शी जांच की अपेक्षा को और अधिक प्रबल करता है।

Pratahkal Bureau

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