चित्तौड़गढ़ में पश्चिमी विक्षोभ का तांडव: कड़ाके की ठंड और बादलों की ओट में ठिठुरा जनजीवन
चित्तौड़गढ़ में पश्चिमी विक्षोभ ने बरपाया कहर! पिछले 48 घंटों में भारी तापमान गिरने और उत्तरी हवाओं के चलने से पूरा जिला भीषण ठंड की चपेट में है। आसमान में छाए घने काले बादलों और सूर्य देव के न निकलने से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कड़ाके की ठंड और आगामी 48 घंटों में संभावित मावठ की पूरी रिपोर्ट पढ़ें इस विशेष लेख में।

चित्तौड़गढ़। राजस्थान के हृदय स्थल और शक्ति व भक्ति की पावन नगरी चित्तौड़गढ़ में इन दिनों मौसम के बदले मिजाज ने आम जनजीवन की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। हिमालयी क्षेत्रों से सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ के व्यापक असर के चलते पिछले 48 घंटों के भीतर समूचे जिले में कुदरत का एक अलग ही रूप देखने को मिल रहा है। अचानक हुई इस करवट ने न केवल पारे को नीचे धकेला है, बल्कि समूचे जिले को भीषण ठिठुरन की चादर में लपेट लिया है। उत्तरी दिशा से आ रही बर्फीली हवाओं ने कनकनी इस कदर बढ़ा दी है कि दिन के उजाले में भी लोग हाड़ कपा देने वाली ठंड का अहसास कर रहे हैं।
जिले के मौसम विज्ञान केंद्र और स्थानीय प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो दिनों में न्यूनतम और अधिकतम तापमान में अप्रत्याशित गिरावट दर्ज की गई है। इस मौसमी बदलाव का सबसे गहरा प्रभाव स्थानीय बाजारों और सड़कों पर देखने को मिल रहा है, जहाँ शाम ढलते ही सन्नाटा पसर जाता है। ठंडी हवाओं के तीखे प्रहार के कारण लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं, जिससे व्यापारिक गतिविधियां भी सुस्त पड़ गई हैं। शुक्रवार की सुबह जब चित्तौड़गढ़ वासियों की आंख खुली, तो आसमान काले घने बादलों से घिरा हुआ था। प्रकृति का पहरा ऐसा था कि दोपहर बीत जाने के बाद भी सूर्य देव के दर्शन नहीं हुए, जिसके कारण धूप की गर्माहट के लिए लोग तरसते नजर आए।
हवा में नमी की अधिकता और सूर्य के प्रकाश के अभाव ने गलन (Chill) को चरम पर पहुँचा दिया है। शहर के व्यस्ततम चौराहों से लेकर ग्रामीण अंचलों की पगडंडियों तक, हर तरफ लोग भारी ऊनी कपड़ों, जैकेट और मफलरों में पूरी तरह लिपटे दिखाई दे रहे हैं। ठंड से राहत पाने के लिए नगर के प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर लोग अलाव जलाकर बैठे नजर आ रहे हैं, जो इस समय राहत का एकमात्र सहारा बना हुआ है। मौसम विभाग की मानें तो अभी राहत के आसार कम ही हैं। आगामी 24 से 48 घंटों तक जिले के आसमान पर बादलों का डेरा जमा रहने की प्रबल संभावना है, साथ ही कहीं-कहीं हल्की 'मावठ' (शीतकालीन वर्षा) होने के भी संकेत मिले हैं। यदि मावठ गिरती है, तो गलन में और इजाफा हो सकता है, जिससे प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने भी आमजन को सतर्क रहने की सलाह दी है।

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