जिले में अवैध बजरी खनन और परिवहन के खिलाफ प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के बावजूद माफियाओं के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं। इस अवैध कारोबार को लेकर समाचार प्रकाशित होने के बाद पारसोली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बजरी से भरे पांच ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को जब्त कर चालकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। हालांकि, इस कार्रवाई के इतर बस्सी और साड़ास थाना क्षेत्रों में स्थिति बिल्कुल विपरीत है, जहां बजरी से लदे वाहन अभी भी बेखौफ होकर दौड़ रहे हैं और दिनदहाड़े बस्सी कस्बे के विभिन्न स्थानों पर बजरी खाली कर रहे हैं।

क्षेत्रीय ग्रामीणों के अनुसार, साड़ास थाना क्षेत्र स्थित शोकिया गांव को बजरी माफियाओं ने अपने अवैध संचालन का मुख्य केंद्र बना रखा है। इन वाहनों का मुख्य मार्ग साड़ास से शुरू होकर इटावा और सहाड़ा से गुजरते हुए शोकिया स्थित देवनारायण मंदिर तक पहुंचता है, जहां से ये बस्सी और राजगढ़ होते हुए बिजयपुर एवं पारसोली क्षेत्रों में बजरी की आपूर्ति करते हैं। भीलवाड़ा जिले और मनकड़ी क्षेत्र से आने वाली बजरी साड़ास से होकर गुजरती है, जिसका लाभ उठाकर माफिया आमजन को ऊंचे दामों पर रेत बेच रहे हैं।

पुलिस की सख्ती का सामना करने के लिए अब माफियाओं ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। पहले जो बजरी माफिया सारण मार्ग का उपयोग करते थे, वे अब पुलिस की धरपकड़ से बचने के लिए इटावा, शोकिया, सहाड़ा और मोरटंकी जैसे ग्रामीण मार्गों का इस्तेमाल कर रहे हैं। विशेषकर रात्रि के समय डंपर और ट्रेलर के भारी आवागमन से स्थानीय निवासियों की रातों की नींद हराम हो गई है। जिला पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह यादव के निर्देश पर चलाए जा रहे अभियान के तहत पारसोली पुलिस ने 25 टन अवैध बजरी जब्त कर एक बड़ी सफलता हासिल की है। इस कार्रवाई में थाना प्रभारी ठाकराराम के नेतृत्व में एसएसआई गोविंद सिंह, भैरूलाल और कांस्टेबल गिरिराज, प्रमोद, रघुवीर एवं कमल की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि माफियाओं का तंत्र पुलिस की हर गतिविधि पर बारीक नजर रखे हुए है। आरोप है कि बस्सी थाने के आसपास चाय की दुकानों पर माफियाओं के गुर्गे तैनात रहते हैं, जो पुलिस की हर मूवमेंट की जानकारी वाहन चालकों को पहले ही दे देते हैं। प्रशासनिक कार्रवाई और माफियाओं की इस चालाकी के बीच आम जनता अभी भी इस अवैध कारोबार के दुष्परिणाम झेलने को मजबूर है। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि बजरी माफियाओं के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए पुलिस को अपनी रणनीतियों में और अधिक कड़ाई और गोपनीयता बरतने की आवश्यकता है।

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