चित्तौड़गढ़: आईसीएआई द्वारा बैंक ब्रांच ऑडिट पर सेमिनार का सफल आयोजन
सेमिनार में विशेषज्ञों ने एनपीए पहचान, लोन वेरिफिकेशन और ऑडिटिंग के व्यावहारिक पहलुओं पर सीए सदस्यों का मार्गदर्शन किया।

चित्तौड़गढ़। सीआईआरसी ऑफ आईसीएआई के तत्वावधान में ऑडिटिंग एवं एश्योरेंस स्टैंडर्ड बोर्ड के सहयोग से 'बैंक ब्रांच ऑडिट' विषय पर एक दिवसीय महत्वपूर्ण सेमिनार का गरिमामयी आयोजन किया गया। चित्तौड़गढ़ शाखा अध्यक्ष प्रकाश मुरोठिया ने कार्यक्रम की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्तमान बैंकिंग परिदृश्य में ऑडिटिंग के व्यावहारिक और तकनीकी पहलुओं को समझना चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए अनिवार्य हो गया है। सेमिनार के प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता कुलदीप गुप्ता ने 'बैंक ऑडिट एवं रिपोर्टिंग में प्रमुख मुद्दे' विषय पर विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने ऑडिट प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न होने वाली व्यावहारिक जटिलताओं, संभावित जोखिम क्षेत्रों तथा रिपोर्टिंग में बरती जाने वाली अनिवार्य सावधानियों को जीवंत उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट किया। पीयूष अग्रवाल ने सत्र की जानकारी देते हुए बताया कि वक्ताओं ने रिपोर्टिंग की बारीकियों पर विशेष बल दिया।
द्वितीय सत्र की कमान वक्ता राकेश भंडारी ने संभाली, जिसमें उन्होंने 'लोन एवं एडवांस की वेरिफिकेशन' जैसे संवेदनशील विषय पर गहन चर्चा की। उपाध्यक्ष दीप्ति सेठिया ने बताया कि इस सत्र के दौरान डॉक्यूमेंटेशन, सिक्योरिटी वैल्यूएशन, एनपीए (NPA) की सटीक पहचान तथा एक ऑडिटर की विधिक जिम्मेदारियों को विस्तार से समझाया गया, जिससे उपस्थित सदस्यों को बैंकिंग कार्यप्रणाली की गहरी समझ प्राप्त हुई। शाखा अध्यक्ष प्रकाश चंद्र मुरोटिया ने अपने उद्बोधन में रेखांकित किया कि बैंक ऑडिट आज के दौर में एक अत्यंत जिम्मेदारीपूर्ण कार्य है, जिसमें निरंतर अद्यतन ज्ञान और उच्च स्तरीय सतर्कता की आवश्यकता होती है। उन्होंने विश्वास जताया कि ऐसे तकनीकी सत्र सदस्यों की व्यावसायिक दक्षता और क्षमता को सशक्त कर उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करते हैं।
इस अवसर पर गोपाल मूंदड़ा, नितेश सेठिया और नीरव दोशी की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में अर्पित पोखरना, अंकित पोरवाल, दीपक बसेर, संगीता नाहटा, शैफाली भड़कत्या, सनिल तातेड, श्रेयांस जैन, कमला अग्रवाल, पूनम भाटी, सिद्धार्थ गुप्ता, गिरिराज गर्ग, दीपक सोनी, कंचन सोनी, भरत कुमार जैन, पुनीत भड़कत्या, श्रेयांस छाजेड़, श्रेयन ढिलीवाल सहित अन्य गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे। यह सेमिनार सदस्यों को बैंक ऑडिट के क्षेत्र में और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा उनके पेशेवर दृष्टिकोण को व्यापकता प्रदान करने में सफल सिद्ध हुआ।

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