चित्तौड़गढ़: सैनिक स्कूल के गौरव आईएएस बाबू लाल मीणा ने कैडेट्स को दिया सफलता का मंत्र, कहा— 'ईमानदारी ही सबसे बड़ी शक्ति'
चित्तौड़गढ़ सैनिक स्कूल के पूर्व छात्र और यूपी के अतिरिक्त मुख्य सचिव आईएएस बाबू लाल मीणा ने विद्यालय पहुंचकर कैडेट्स को प्रेरित किया। उन्होंने ईमानदारी, अनुशासन और मोबाइल के संतुलित उपयोग का महत्व समझाते हुए अपने 40 वर्षों के प्रशासनिक अनुभव साझा किए। कर्नल अनिल देव सिंह जसरोटिया की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम ने छात्रों में नई ऊर्जा का संचार किया।

चित्तौड़गढ़। मेवाड़ की वीर धरा पर स्थित प्रतिष्ठित सैनिक स्कूल का शंकर मेनन सभागार मंगलवार को एक अभूतपूर्व ऊर्जा और प्रेरणा का साक्षी बना। अवसर था एक ऐसे व्यक्तित्व की वापसी का, जिसने इसी प्रांगण में अनुशासन का पाठ पढ़कर सफलता के उच्चतम सोपानों को छुआ। उत्तर प्रदेश सरकार के बागवानी, खाद्य प्रसंस्करण और रेशम उत्पादन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (आईएएस) बाबू लाल मीणा जब मुख्य अतिथि के रूप में अपने पुराने स्कूल पहुंचे, तो वातावरण 'स्वदेश वापसी' जैसा भावुक और गौरवमयी हो गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ गरिमामय सैन्य परंपराओं के बीच हुआ। स्कूल पहुंचने पर प्राचार्य कर्नल अनिल देव सिंह जसरोटिया और प्रशासनिक अधिकारी मेजर सी श्रीकुमार ने मुख्य अतिथि का गर्मजोशी से स्वागत किया। मंच पर कैडेट राज्यवर्धन सिंह नरुका ने मुख्य अतिथि का परिचय देते हुए बताया कि बाबूलाल शिवरान के अनुसार आईएएस बाबू लाल मीणा इसी विद्यालय के एक अत्यंत प्रतिष्ठित पूर्व छात्र रहे हैं। लगभग चार दशक पूर्व उन्होंने इसी संस्थान से शिक्षा प्राप्त कर आईआईटी दिल्ली के लिए प्रस्थान किया था और तत्पश्चात भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित होकर राष्ट्र सेवा का संकल्प लिया।
सभागार में मौजूद युवा कैडेट्स को संबोधित करते हुए आईएएस मीणा ने अपने जीवन के संस्मरण साझा किए। उन्होंने सफलता का मूल मंत्र देते हुए स्पष्ट किया कि जीवन में ईमानदारी से बड़ी कोई शक्ति नहीं है। उन्होंने आधुनिक युग की चुनौतियों पर चर्चा करते हुए कैडेट्स को सचेत किया कि डिजिटल क्रांति के इस दौर में मोबाइल जीवन का अनिवार्य हिस्सा तो है, लेकिन इसका अत्यधिक उपयोग फायदे से अधिक मानसिक और रचनात्मक नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने कैडेट्स के साथ सीधा संवाद करते हुए उन्हें एकता और अनुशासन के मार्ग पर अडिग रहने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम का संचालन कैडेट अंकित राजपुरोहित ने कुशलतापूर्वक किया, जबकि स्कूल के उप कप्तान मधुसुदन ने मुख्य अतिथि के प्रति आभार प्रकट करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य कर्नल अनिल देव सिंह जसरोटिया ने पूरे स्कूल परिवार की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट कर उन्हें सम्मानित किया। यह सभा न केवल एक औपचारिक आयोजन थी, बल्कि इसने कैडेट्स के भीतर आत्मविश्वास और सकारात्मक परिवर्तन की एक नई लौ प्रज्वलित की, जो आने वाले समय में देश को नए नेतृत्वकर्ता देने में सहायक सिद्ध होगी।

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