राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में हाईवे किनारे फल-फूल रहे अवैध ईंधन माफियाओं के विरुद्ध पुलिस और प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया है। जिला रसद विभाग और सदर थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने उदयपुर मार्ग पर स्थित दो बड़े ठिकानों पर छापेमारी कर तेल चोरी के एक विशाल नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस पूरी कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने 22 हजार लीटर से अधिक अवैध पेट्रोलियम पदार्थ, पंप और अन्य तकनीकी उपकरण जब्त किए हैं, जिससे समूचे हाईवे बेल्ट पर अवैध धंधा करने वालों में खलबली मच गई है।

जिला स्पेशल टीम को पिछले लंबे समय से उदयपुर हाईवे के पास अवैध पेट्रोलियम भंडारण की पुख्ता सूचनाएं मिल रही थीं। सटीक जानकारी के आधार पर टीम ने सबसे पहले भण्डारिया क्षेत्र के समीप एक बाड़े पर अचानक दबिश दी। वहां सघन तलाशी के दौरान 98 ड्रम बरामद हुए, जिनमें से 90 ड्रमों में करीब 15,980 लीटर अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ भरा हुआ था। मौके से पुलिस ने मनीष शर्मा नामक व्यक्ति को हिरासत में लिया है। यद्यपि आरोपी ने पकड़े गए पदार्थ को 'सॉल्वेंट' बताकर बचने का प्रयास किया, लेकिन प्रथम दृष्टया पुलिस इसे मिलावटी या चोरी का पेट्रोलियम मानकर जांच कर रही है।

इस कार्रवाई के तत्काल बाद, पहले ठिकाने से महज डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित रिठोला के एक होटल पर दूसरी टीम ने छापा मारा। यहां पुलिस ने इंडियन ऑयल के एक टैंकर को रंगे हाथ पकड़ा, जिसका चालक अवैध रूप से फ्यूल टैंक से डीजल चोरी करवा रहा था। होटल के पिछले हिस्से में एक पिकअप गाड़ी में रखे 30 ड्रम और 5 जरीकेन से 6,100 लीटर अवैध ईंधन बरामद किया गया। पुलिस ने होटल संचालक राजू गाडरी को हिरासत में ले लिया है, जबकि इस काले खेल का मुख्य सूत्रधार कन्हैया लाल तेली फिलहाल फरार बताया जा रहा है।

प्रारंभिक जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि हाईवे के किनारे सामान्य दिखने वाले ये होटल और ढाबे महज एक मुखौटा थे, जिनके पीछे टैंकर चालकों की मिलीभगत से तेल चोरी का संगठित खेल चल रहा था। टैंकर चालक कम दामों के लालच में यहां पेट्रोल-डीजल बेच देते थे। सबसे गंभीर बात यह है कि बिना किसी सुरक्षा मानकों या फायर एनओसी के हजारों लीटर ज्वलनशील पदार्थ का यह भंडारण किसी भी समय भीषण अग्निकांड का सबब बन सकता था। उल्लेखनीय है कि जिस होटल पर यह कार्रवाई हुई, वहां पूर्व में भी जब्ती की जा चुकी है, किंतु माफियाओं के हौसले इतने बुलंद थे कि उन्होंने पुनः इस अवैध कारोबार को शुरू कर दिया।

इस सफल ऑपरेशन का नेतृत्व पुलिस उपाधीक्षक बृजेश सिंह, सदर थानाधिकारी प्रेम सिंह, जिला रसद अधिकारी हितेश जोशी और सुमन तिवारी सहित पूरी टीम ने किया। रसद विभाग ने संदिग्ध पदार्थों के नमूने लेकर जांच हेतु लैब भेज दिए हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम और मानव जीवन को खतरे में डालने जैसी गंभीर धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया है। अब पुलिस की जांच का केंद्र यह है कि तेल चोरी का यह नेटवर्क किन-किन शहरों तक फैला है और इस अंतरराज्यीय सिंडिकेट का मुख्य सरगना कौन है।

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