ए-नेगेटिव ब्लड की तत्काल जरूरत पर अधिकारी ने किया रक्तदान, हाई रिस्क प्रसूता की बची जान
निम्बाहेडा में ए-नेगेटिव ब्लड की तत्काल जरूरत पर अधिकारी ने रक्तदान कर हाई रिस्क प्रसूता की मदद की। जानिए स्वास्थ्य विभाग की मॉनिटरिंग व्यवस्था।

चित्र में बाएं खड़े स्वास्थ्य कर्मी और अस्पताल के बेड पर लेटे रक्तदान करते अधिकारी नजर आ रहे हैं।
जिले में स्वास्थ्य विभाग ‘सुरक्षित, स्वस्थ और सेहतमंद प्रसव’ की प्राथमिकता को केवल कागजों तक सीमित नहीं रख रहा, बल्कि इसके लिए धरातल पर भी त्वरित कदम उठाए जा रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण बुधवार को महिला एवं बाल चिकित्सालय में देखने को मिला, जहां एक गंभीर उच्च जोखिम (हाई रिस्क) प्रसूता की जान बचाने के लिए विभागीय अधिकारी ने स्वयं रक्तदान किया।
जानकारी के अनुसार, खंड चित्तौड़गढ़ के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (नेतावल महाराज) के चिकित्सक डॉ. सार्थक दशोरा ने 20 वर्षीय उच्च जोखिम प्रसूता सुगना भील (पत्नी निवास, नेतावल महाराज) को 104 जननी एक्सप्रेस के माध्यम से जिला महिला एवं बाल चिकित्सालय रेफर किया था। अस्पताल में जांच और उपचार के दौरान चिकित्सकों ने पाया कि प्रसूता को तत्काल रक्त चढ़ाने की आवश्यकता है। महिला का ब्लड ग्रुप ए-नेगेटिव था, जो दुर्लभ होने के कारण सीमित मात्रा में उपलब्ध रहता है।
इसी दौरान राजकीय कार्य से अस्पताल में मौजूद शहरी कार्यक्रम प्रबंधक (यूपीएम) श्री अनिल शर्मा को जैसे ही इस स्थिति की जानकारी मिली, उन्होंने बिना देर किए जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक पहुंचकर स्वयं रक्तदान किया। उनके रक्तदान से प्रसूता को समय पर ए-नेगेटिव ब्लड उपलब्ध कराया गया, जिससे उपचार में आवश्यक सहायता मिल सकी।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ताराचंद गुप्ता ने बताया कि जिले में उच्च जोखिम प्रसूताओं (एचआरपी) के बेहतर उपचार, समय पर जांच और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से सुदृढ़ मॉनिटरिंग व्यवस्था लागू की गई है। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर स्थापित नियंत्रण कक्ष से प्रतिदिन उन सभी गर्भवती महिलाओं से फोन पर संपर्क किया जा रहा है, जिनका प्रसव जुलाई या अगस्त माह में संभावित है। इस दौरान उनकी वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति और प्रसव के लिए निर्धारित स्थान की जानकारी ली जा रही है।
उन्होंने बताया कि मैदानी स्तर पर आशा और एएनएम द्वारा गर्भवती महिलाओं की आवश्यक जांच, टीकाकरण, 104/108 एम्बुलेंस सेवा से समन्वय तथा दस्तावेजों की प्रविष्टियों की गहन जांच की जा रही है, ताकि प्रसव के समय किसी प्रकार की असुविधा उत्पन्न न हो। डॉ. ताराचंद गुप्ता ने स्पष्ट कहा कि जिले में प्रत्येक मां और नवजात की सुरक्षा सुनिश्चित करना ही स्वास्थ्य विभाग का मुख्य ध्येय है और सुरक्षित, स्वस्थ तथा सेहतमंद प्रसव उनकी प्रथम प्राथमिकता है।

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