चित्तौड़गढ़। चित्तौड़गढ़ के प्रतिष्ठित महाराणा प्रताप राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) की चारों इकाइयों के संयुक्त तत्वावधान में सात दिवसीय विशेष शिविर का अत्यंत उत्साहपूर्ण और गरिमामयी शुभारंभ हुआ। सेवा, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ शुरू हुए इस शिविर का उद्घाटन प्राचार्य हेमेंद्रनाथ व्यास की अध्यक्षता में दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। कार्यक्रम के दौरान परिसर 'स्वयंसेवक' की भावना और देशभक्ति के नारों से जीवंत हो उठा, जो आगामी एक सप्ताह तक चलने वाली शैक्षणिक और सामाजिक गतिविधियों की आधारशिला बना।

प्राचार्य हेमेंद्रनाथ व्यास ने अपने स्वागत उद्बोधन में शिविर की औपचारिक शुरुआत की घोषणा करते हुए स्वयंसेवकों को अनुशासन का महत्व समझाया। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि ऐसे शिविरों का प्राथमिक उद्देश्य केवल सामाजिक कार्य करना नहीं, बल्कि युवाओं के भीतर साहसिक गतिविधियों के प्रति रुचि जगाना और विपरीत परिस्थितियों में जोखिम लेने की क्षमता विकसित करना है। विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित सेवानिवृत्त प्रोफेसर एस. एम. शर्मा ने नवाचारों के माध्यम से व्यक्तित्व विकास के गुरु सिखाए, जबकि संदीप शर्मा ने राष्ट्रीय सेवा योजना के मूलभूत उद्देश्यों और इसके गौरवशाली इतिहास से सदन को परिचित कराया। वहीं, छात्र दीपक खटीक ने अपने पुराने शिविरों के संस्मरण साझा कर नए स्वयंसेवकों में उत्साह का संचार किया।

समारोह का एक मुख्य आकर्षण मेधावी स्वयंसेवकों का सम्मान रहा। जयपुर के सुबोध पीजी कॉलेज में आयोजित 'राष्ट्रीय एकता शिविर' से लौटे जगदीश खटीक और दीपक खटीक के साथ-साथ राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए चयनित स्वयंसेवक खुशी पांडे को उपरना पहनाकर सम्मानित किया गया। शिविर के प्रथम दिन ही प्रबंधन की सक्रियता देखने को मिली, जहाँ कार्यक्रम प्रभारी डॉ. हेमलता महावर के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों को चार विशिष्ट दलों—पद्मिनी, प्रताप, राणा कुंभा और मीरा दल—में विभाजित किया गया। यह विभाजन न केवल कार्यकुशलता बढ़ाएगा बल्कि विद्यार्थियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना भी विकसित करेगा।

यह विशेष शिविर 9 जनवरी तक निरंतर संचालित होगा, जिसमें विद्यार्थियों को स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, नशा मुक्ति और स्वास्थ्य जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक विषयों पर प्रशिक्षित किया जाएगा। कार्यक्रम का कुशल संचालन अधिकारी बालकृष्ण लड्ढा ने किया, जबकि सुशील काबरा और भारती भावनी ने सक्रिय सहयोग प्रदान कर व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाया। इस अवसर पर डॉ. भारती मेहता, सुमन डाड सहित महाविद्यालय के समस्त संकाय सदस्य उपस्थित रहे। यह सात दिवसीय आयोजन न केवल विद्यार्थियों के नेतृत्व कौशल को निखारेगा बल्कि उन्हें समाज सेवा और राष्ट्रवाद के आदर्शों को जीवन में उतारने के लिए एक ठोस धरातल प्रदान करेगा।

Pratahkal Bureau

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