ग्रामीण सेवा शिविर: नाम में सुधार से बदली किसान की तकदीर, अब योजनाओं का मिलेगा लाभ
चित्तौड़गढ़ के डूंगला में ग्रामीण सेवा शिविर ने कैसे एक किसान की वर्षों पुरानी सरकारी दस्तावेजी उलझन को सुलझाया? नाम की एक छोटी सी गलती जो बन रही थी योजनाओं में बाधा, अब प्रशासन की मदद से कैसे हुई दूर? जानिए इस सफलता की पूरी कहानी।

चित्तौड़गढ़ के डूंगला में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर में प्रशासन ने किसान के राजस्व रिकॉर्ड में नाम की विसंगति का मौके पर ही निराकरण किया।
चित्तौड़गढ़। डूंगला तहसील के पालोद ग्राम में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर स्थानीय ग्रामीणों के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभरा, जहाँ वर्षों से नाम की विसंगति से जूझ रहे एक किसान की समस्या का चंद घंटों में समाधान हो गया। ग्राम पालोद निवासी रोडू ने शिविर में अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए बताया कि उनके आधार कार्ड एवं जनाधार में नाम 'रोडू' दर्ज है, लेकिन राजस्व विभाग के आधिकारिक अभिलेखों यानी जमाबंदी में यह नाम 'रोड़ा' अंकित था। नाम में इस अंतर ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी थीं, जिसके चलते उन्हें न तो बैंक से ऋण मिल पा रहा था और न ही वे सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठा पा रहे थे।
शिविर में परिवादी द्वारा अपनी समस्या उपखंड अधिकारी, डूंगला के समक्ष प्रस्तुत की गई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उपखंड अधिकारी ने इसे प्राथमिकता पर लिया और तुरंत मौके पर उपस्थित राजस्व टीम को आवश्यक जांच के निर्देश दिए। राजस्व टीम ने त्वरित गति से सभी दस्तावेजों का बारीकी से परीक्षण किया और नियमानुसार प्रक्रिया पूरी करते हुए जमाबंदी में नाम सुधार की कार्यवाही को अंजाम दिया। राजस्व रिकॉर्ड में 'रोड़ा' के स्थान पर अब 'रोडू' दर्ज कर दिया गया है। अपनी वर्षों पुरानी समस्या का मौके पर ही समाधान पाकर परिवादी ने राहत की सांस ली और राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया। यह शिविर आमजन की समस्याओं के प्रति प्रशासन की संवेदनशीलता और पारदर्शी कार्यप्रणाली का एक जीवंत उदाहरण साबित हुआ है।

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