चित्तौड़गढ़ दुर्ग: आर्य वीर दल के शिविरार्थियों ने की ऐतिहासिक पदयात्रा
श्री गुरुकुल के आवासीय शिविर के तहत युवाओं ने दुर्गम पहाड़ी मार्ग से दुर्ग तक चढ़ाई कर संस्कृति और इतिहास की शिक्षा ली।

चित्तौड़गढ़। श्री गुरुकुल में आयोजित दस दिवसीय प्रांतीय आवासीय शिविर के अंतर्गत शुक्रवार को युवा आर्य वीरों ने अदम्य साहस और राष्ट्रभक्ति का परिचय देते हुए चित्तौड़गढ़ दुर्ग का भ्रमण किया। शिविर के कड़े अनुशासन का पालन करते हुए युवा सुबह गांधी नगर क्षेत्र से दुर्ग की ओर रवाना हुए। इस दौरान युवाओं ने सुगम मार्ग के स्थान पर पहाड़ी पगडंडियों से दुर्ग पर सीधी चढ़ाई करने का चुनौतीपूर्ण निर्णय लिया। ऊबड़-खाबड़ और दुर्गम रास्तों को पार करते हुए देशभक्ति के जयकारों के साथ युवाओं ने अत्यंत कम समय में दुर्ग के शीर्ष पर पहुँचकर अपनी शारीरिक क्षमता का परिचय दिया।
दुर्ग भ्रमण के दौरान शिविरार्थी विजय स्तंभ के प्रांगण में स्थित पवित्र जौहर स्थल पर एकत्रित हुए। यहाँ आर्य वीरों ने जौहर की पावन माटी को मस्तक पर लगाकर महान वीरांगनाओं को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस पवित्र स्थल पर युवाओं ने सामूहिक गायत्री मंत्र का जाप किया और मौन धारण कर ध्यान लगाया, जिससे संपूर्ण परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो उठा। इस अवसर पर विशाल माहेश्वरी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि चित्तौड़गढ़ मात्र एक किला नहीं, बल्कि देश के स्वाभिमान, बलिदान और आर्य संस्कृति का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने युवाओं को बप्पा रावल से लेकर राणा सांगा, उदयसिंह, जयमल-फत्ता के संघर्षों और इस भूमि पर हुए तीन महान साकों की गौरवशाली वीरगाथाओं से अवगत कराया।
इस शिविर का मुख्य उद्देश्य युवाओं को शारीरिक रूप से सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ उन्हें गौरवशाली संस्कृति और इतिहास से जोड़ना है। शिविर में युवाओं को लाठी संचालन, आत्मरक्षा, योग और आपदा प्रबंधन के साथ-साथ नैतिक व राष्ट्रभक्ति के संस्कारों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे भविष्य में देश के आदर्श नागरिक बन सकें।

