चित्तौड़गढ़ में 15 दिवसीय उर्वरक विक्रेता सर्टिफिकेट कोर्स का समापन
कृषि विज्ञान केन्द्र चित्तौड़गढ़ द्वारा आयोजित प्रशिक्षण में 50 प्रतिभागियों को उर्वरक व्यवसाय और वैज्ञानिक खेती के गुर सिखाए गए।

चित्तौड़गढ़ के कृषि विज्ञान केन्द्र में 15 दिवसीय खुदरा उर्वरक विक्रेता प्रशिक्षण के समापन अवसर पर प्रमाण पत्र के साथ उपस्थित वैज्ञानिक और प्रशिक्षणार्थी।
कृषि क्षेत्र में दक्षता और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा आयोजित 15 दिवसीय खुदरा उर्वरक विक्रेता सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम प्रशिक्षण का सफलतापूर्वक समापन हुआ। समापन समारोह में विशेषज्ञों ने प्रशिक्षणार्थियों को व्यवसायिक निष्ठा और किसानों के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया।
समापन अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. प्रताप सिंह ने अपने उद्बोधन में प्रशिक्षणार्थियों को सच्ची लग्न और निष्ठा के साथ अपने व्यवसाय को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सही समय पर किसानों को उचित सुझाव देकर वे अप्रत्यक्ष रूप से परिवर्तन के अभिकर्ता बन सकते हैं। डॉ. आर.एल. सोनी ने प्रतिभागियों को कृषि विज्ञान केन्द्र से सतत जुड़े रहने की सलाह दी, जिससे कृषि में हो रहे नवाचारों के माध्यम से वे किसानों को लाभान्वित कर सकें।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. रतन लाल सोलंकी ने उर्वरक उपयोग दक्षता बढ़ाने के उपायों पर विस्तृत जानकारी दी तथा टिकाऊ खेती, समन्वित कृषि पद्धति और फसल विविधीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डालते हुए प्रशिक्षणार्थियों का ज्ञानवर्धन किया। प्रशिक्षण सह-समन्वयक दीपा इन्दौरिया ने बताया कि इस प्रशिक्षण में जिले की विभिन्न पंचायत समितियों से कुल 50 प्रशिक्षणार्थियों ने भाग लिया, जिन्हें उर्वरक सर्टिफिकेट कोर्स से संबंधित सैद्धान्तिक एवं प्रायोगिक जानकारी विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों और राज्य सरकार के कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा प्रदान की गई।
प्रशिक्षण के दौरान डॉ. के.के. यादव, डॉ. योगेश कन्नोजिया, दिनेश जागा, डॉ. रमेश धाकड़, डॉ. अंशु चौधरी, ओम प्रकाश शर्मा, रमेश आमेटा, डॉ. दिनेश जाट, विक्रम सिंह, गोपाल धाकड़, ज्योति प्रकाश सिरोया, सुनिल खोईवाल, राम गोपाल आर्य, मुकेश आमेटा, महेन्द्र डूडी और सुनिल गगरानी सहित अन्य विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर तकनीकी वार्ताएं दीं।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल उर्वरक विक्रेताओं की क्षमता बढ़ाने में सहायक सिद्ध हुआ, बल्कि किसानों तक वैज्ञानिक और समयानुकूल सलाह पहुंचाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।

Pratahkal Bureau
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