चित्तौड़गढ़। आयुक्त कृषि एवं जिला प्रशासन के सख्त निर्देशों के अनुपालन में जिले के किसानों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु कृषि विभाग ने एक विशेष अभियान छेड़ दिया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य यूरिया के अवैध डायवर्जन और जमाखोरी पर प्रभावी अंकुश लगाना है, जिसके तहत विभागीय दलों द्वारा अधिक मात्रा में विक्रय करने वाले उर्वरक विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों पर सघन छापेमारी और निरीक्षण की कार्यवाही की जा रही है।

संयुक्त निदेशक कृषि डॉ. शंकर लाल जाट के कुशल निर्देशन में गठित विशेष टीमों द्वारा 11 अप्रैल से निरंतर संचालित इस अभियान के अंतर्गत अब तक कुल 81 उर्वरक विक्रेताओं के ठिकानों की गहन जांच की गई है। निरीक्षण की इस प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं उजागर होने पर विभाग ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए 29 विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे स्पष्टीकरण तलब किया है। इसके अतिरिक्त, अभियान की गंभीरता को देखते हुए 5 उर्वरक विक्रेताओं के यहां उर्वरक की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।

प्रशासनिक स्तर पर की गई इस कानूनी एवं दंडात्मक कार्यवाही के तहत मूल्य सूची प्रदर्शित नहीं करने, स्टॉक विवरण का उचित प्रदर्शन न करने और अनिवार्य अभिलेखों के संधारण में भारी लापरवाही बरतने पर संबंधित अधिकारियों की अनुशंसा के आधार पर 4 प्रमुख फर्मों के उर्वरक अनुज्ञापत्र (लाइसेंस) तत्काल निलंबित कर दिए गए हैं। इन निलंबित फर्मों में मैसर्स दीपक ट्रेडर्स (सारण), एस.के. क्रॉप (बस्सी), मैसर्स गट्याणी एंड कम्पनी (पुराना बस स्टेण्ड) एवं मैसर्स कालिका खाद बीज भंडार (जवाहर नगर) शामिल हैं। कृषि विभाग की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई ने जिले के उर्वरक विक्रेताओं के बीच हड़कंप मचा दिया है, जो भविष्य में कृषि आदानों की कालाबाजारी रोकने और किसानों के हितों के संरक्षण की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगी।

Pratahkal Newsroom

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