चित्तौड़गढ़: सरसों की उन्नत खेती और मोयला कीट प्रबंधन पर किसानों को मिला तकनीकी प्रशिक्षण
चित्तौड़गढ़ के भैंसरोड़गढ़ में कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा सरसों की उन्नत किस्म आर.एच. 761 और मोयला कीट प्रबंधन पर विशेष प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रतन लाल सोलंकी और विशेषज्ञ संजय कुमार धाकड़ ने 56 किसानों को कीट नियंत्रण और बीज उत्पादन के जरिए आय बढ़ाने के गुर सिखाए। जानिए कैसे वैज्ञानिक खेती बदल रही है चित्तौड़गढ़ के किसानों की तकदीर।

चित्तौड़गढ़। कृषि क्षेत्र में नवाचार और उन्नत तकनीकों के समावेश से किसानों की आय दोगुनी करने के संकल्प के साथ, पंचायत समिति भैंसरोड़गढ़ के ग्राम शम्भूनाथ जी का खेड़ा में शनिवार को एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य केंद्र बिंदु सरसों की नवीन उन्नत किस्म 'आर.एच. 761' के प्रथम पंक्ति प्रदर्शन रहे। इस आयोजन ने न केवल क्षेत्र के किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों से रूबरू कराया, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने का एक ठोस मार्ग भी प्रशस्त किया। प्रशिक्षण सत्र में क्षेत्र के 56 प्रगतिशील कृषकों और कृषक महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर आधुनिक कृषि के गुर सीखे।
कार्यक्रम के दौरान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रतन लाल सोलंकी ने जीवंत प्रदर्शन के माध्यम से किसानों को पारंपरिक खेती और आधुनिक वैज्ञानिक पद्धति के बीच के स्पष्ट अंतर को समझाया। उन्होंने खेतों का सूक्ष्म निरीक्षण करते हुए बताया कि किस प्रकार सही किस्म का चयन और वैज्ञानिक प्रबंधन फसल की गुणवत्ता और पैदावार को प्रभावित करता है। निरीक्षण के दौरान वर्तमान में सरसों की फसल पर मंडरा रहे मोयला कीट (एफिड्स) के प्रकोप को गंभीरता से लेते हुए डॉ. सोलंकी ने इसके तत्काल उपचार और बचाव के वैज्ञानिक उपायों पर विस्तार से प्रकाश डाला, ताकि किसानों की मेहनत पर कीटों का साया न पड़े।
तकनीकी सत्र को आगे बढ़ाते हुए विशेषज्ञ संजय कुमार धाकड़ ने पौध संरक्षण के विविध आयामों पर चर्चा की। उन्होंने किसानों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे केवल उपज तक सीमित न रहें, बल्कि उत्पादित उन्नत बीज का उचित भंडारण कर उसे आगामी बुवाई के लिए स्वयं उपयोग करें और पड़ोसी गांवों में बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित करें। कार्यक्रम के समापन पर शंकर लाल नाई ने उपस्थित सभी कृषकों एवं महिलाओं का आभार व्यक्त करते हुए इस प्रशिक्षण को ग्रामीण समृद्धि की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। यह आयोजन न केवल कीट प्रबंधन के प्रति जागरूकता लाने में सफल रहा, बल्कि इसने किसानों को एक 'उद्यमी' के रूप में सोचने के लिए नई ऊर्जा प्रदान की।

Pratahkal Bureau
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