अन्नदाता की आय को दोगुना करने और कृषि क्षेत्र में आधुनिक क्रांति का सूत्रपात करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बेहद महत्वाकांक्षी कदम उठाया है। भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान, लुधियाना द्वारा देश के गौरवशाली इतिहास को समेटे चित्तौड़गढ़ जिले में किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ी और महत्वपूर्ण पहल की गई है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित 'एथेनॉल उद्योगों के जलग्रहण क्षेत्रों में मक्का उत्पादन में वृद्धि परियोजना' के अंतर्गत जिले के ग्रामीण अंचलों में मक्का की उन्नत किस्मों के मिनीकिट डेमो वितरण कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया, जिसने क्षेत्र के किसानों में समृद्धि की एक नई अलख जगा दी है।

इस दूरदर्शी परियोजना के तहत चित्तौड़गढ़ जिले के मनोहर खेड़ी और भाटोली गुजरान गांवों को इस आधुनिक कृषि अभियान का मुख्य केंद्र बनाया गया। कार्यक्रम के दौरान दोनों गांवों के कुल 43 चयनित किसानों को मक्का की उन्नत किस्मों के बीज मिनीकिट पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराए गए। इस वितरण का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खेती की कड़ियों को तोड़कर किसानों को आधुनिक एवं पूरी तरह से वैज्ञानिक पद्धतियों से मक्का उत्पादन करने के लिए प्रेरित करना है। कृषि विशेषज्ञों ने उपस्थित किसानों को मक्का की उन्नत, टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल खेती की बारीकियों से रूबरू कराया, ताकि वे भविष्य में कम लागत में अधिक और गुणवत्तापूर्ण मुनाफा कमा सकें।

इस उच्च स्तरीय कार्यक्रम में न केवल बीजों का वितरण हुआ, बल्कि देश के भविष्य और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए कई गंभीर आधिकारिक और वैज्ञानिक पहलुओं पर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों द्वारा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा आने वाले समय में एथेनॉल उत्पादन हेतु मक्का की तेजी से बढ़ती मांग और उसकी उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. शंकर लाल जाट ने कार्यक्रम की महत्ता को रेखांकित करते हुए भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान की इस अनूठी पहल की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि यह योजना किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी, क्योंकि उन्नत बीज और वैज्ञानिक खेती पद्धतियों के तालमेल से ही किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त कर अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर सकते हैं। इसके साथ ही संस्थान की ओर से जिले में तैनात यंग प्रोफेशनल शंकर लाल चौधरी ने भी किसानों को मक्का का उत्पादन बढ़ाने, आधुनिक कृषि तकनीकों को पूरी तरह आत्मसात करने और खादों के असंतुलित प्रयोग को रोकने के संबंध में महत्वपूर्ण और तकनीकी जानकारियां साझा कीं।

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