चित्तौड़गढ़ में आबकारी नियमों का उल्लंघन: शराब ठेकेदारों की मनमानी पर विवाद
चित्तौड़गढ़ में शराब दुकानदारों के सिंडिकेट और बाहरी ठेकेदारों के दबाव से स्थानीय कारोबारियों में आक्रोश, आबकारी विभाग ने जांच के दिए निर्देश।

चित्तौड़गढ़ में आबकारी विभाग की नाक के नीचे नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। शहर में बाहरी रसूखदार शराब माफियाओं और ठेकेदारों की मनमर्जी के चलते वर्षों से शांतिपूर्ण तरीके से व्यवसाय कर रहे स्थानीय ठेकेदार रोजी-रोटी के संकट से जूझ रहे हैं। इस गंभीर मामले की शिकायत आबकारी विभाग के उच्चाधिकारियों से की गई, परंतु उनकी रहस्यमयी चुप्पी और निष्क्रियता स्थानीय कारोबारियों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। विभाग की यह उदासीनता उनकी कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रही है।
नियमों को दरकिनार करते हुए दुर्ग मार्ग स्थित शराब की दुकानों के बाहर ग्राहकों को लुभाने के लिए आबकारी नीति के विरुद्ध बैनर टांगे गए हैं। इन बैनरों के माध्यम से मनमर्जी से शराब के मूल्यों में भारी गिरावट का दावा किया जा रहा है, जबकि आबकारी नीति के तहत कोई भी अनुज्ञाधारी दुकान के बाहर इस प्रकार का भ्रामक प्रचार, रेट कटिंग या डिस्काउंट प्रदर्शित नहीं कर सकता। यह अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने का कृत्य दुर्ग मार्ग पर धड़ल्ले से चल रहा है।
इस विवाद में सबसे चौंकाने वाला मोड़ लीकर एसोसिएशन अध्यक्ष द्वारा जारी एक अजीबोगरीब शपथ पत्र है, जिसके माध्यम से स्थानीय ठेकेदारों पर दबाव बनाया जा रहा है। इस कथित आपसी समझौते में 31 मार्च 2027 तक का सिंडिकेट तैयार किया गया है, जिसके तहत सभी ठेकेदारों को अंग्रेजी शराब और बीयर की कीमतें खुद तय कर बेचने पर मजबूर किया जा रहा है। इसके लिए हर दुकान से कमेटी अध्यक्ष के पास 21 हजार रुपये जमा कराए जाने का प्रावधान है। नियम यह है कि यदि कोई ठेकेदार सिंडिकेट की दर से कम मूल्य पर शराब बेचता है, तो दूसरा ठेकेदार ग्राहक बनकर उससे शराब खरीदेगा और पकड़वाने वाले को वही 21 हजार रुपये इनाम स्वरूप दिए जाएंगे। शपथ पत्र में यह भी दावा किया गया है कि कम रेट पर बेचने वाले के खिलाफ एक्साइज इंस्पेक्टर से जुर्माना लगवाया जाएगा और दुकान एक दिन के लिए बंद करवाई जाएगी। साथ ही, कोई भी ठेकेदार एक पेटी से कम पर कमीशन नहीं दे सकता, अन्यथा उसकी जमा राशि जब्त कर ली जाएगी। यह शपथ पत्र स्थानीय और छोटे ठेकेदारों को डराने, धमकाने और बाजार में एकाधिकार स्थापित करने की एक बड़ी साजिश को उजागर करता है।
इस विषय पर आबकारी निरीक्षक जावेद अली ने आंशिक रूप से नियमों के उल्लंघन की बात स्वीकार की, लेकिन एसोसिएशन के इस खेल से पल्ला झाड़ लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुकान के बाहर बैनर लगाकर निजी हित के लिए कम मूल्य प्रदर्शित करना नियमों के विरुद्ध है और इस पर कार्रवाई की जाएगी। एसोसिएशन द्वारा शपथ पत्र जारी करने या समानांतर व्यवस्था चलाने के संबंध में उन्होंने आधिकारिक जानकारी न होने का दावा किया। हालांकि, स्थानीय जागरूक नागरिकों और कारोबारियों का स्पष्ट आरोप है कि अधिकारियों की शह के बिना यह सब संभव नहीं है। बाहरी ठेकेदारों की मनमानी और लीकर एसोसिएशन के दबाव तंत्र के कारण स्थानीय व्यापारियों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।

