चित्तौड़गढ़: ग्राम ऐरा में चारागाह व श्मशान भूमि पर दबंगों का कब्जा, ग्रामीणों में भारी आक्रोश
चित्तौड़गढ़ के ग्राम ऐरा में दबंगों द्वारा चारागाह और श्मशान भूमि पर कब्जे से ग्रामीणों का जीना दुश्वार हो गया है। मवेशियों का चारा छिनने और अंतिम संस्कार में आ रही बाधाओं के बीच, आखिर प्रशासन ने अब तक क्यों नहीं उठाये सख्त कदम?

चित्तौड़गढ़ में ग्राम ऐरा के ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर एकत्रित होकर सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के विरोध में ज्ञापन सौंपा।
चित्तौड़गढ़ जिले के ग्राम पंचायत बोलो का सांवता स्थित ग्राम ऐरा में सरकारी भूमि के संरक्षण को लेकर स्थिति गंभीर बनी हुई है। शुक्रवार को ग्राम ऐरा के समस्त ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर कार्यालय पहुँचकर एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें गांव की चारागाह और श्मशान भूमि को भू-माफियाओं के अवैध चंगुल से मुक्त कराने की पुरजोर मांग की गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि रसूखदार व्यक्तियों ने स्थानीय राजस्व रिकॉर्ड में चारागाह के रूप में दर्ज भूमि पर न केवल कब्जा जमा लिया है, बल्कि वहां पक्के निर्माण कार्य भी शुरू कर दिए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में असंतोष व्याप्त है।
ग्रामीणों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, ग्राम ऐरा के बाहरी हिस्से में नाड़ी के समीप स्थित यह भूमि मवेशियों के चरने और मृत पशुओं के निस्तारण के लिए आरक्षित है। शिकायत में स्पष्ट किया गया है कि दबंग प्रवृत्ति के लोगों ने इस सार्वजनिक भूमि पर न केवल तारबंदी की है, बल्कि इसे छोटे-छोटे प्लॉटों में विभाजित कर अवैध निर्माण शुरू कर दिए हैं। इस अतिक्रमण के कारण जहां एक ओर मवेशियों के लिए चारे का संकट उत्पन्न हो गया है, वहीं दूसरी ओर श्मशान भूमि तक पहुंच बाधित होने से दाह-संस्कार जैसे संवेदनशील कार्यों में भी स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि उक्त दबंगों द्वारा पूर्व में भी भूमि पर कब्जा करने के प्रयास किए गए थे, जिसके विरुद्ध ग्रामीणों ने समय-समय पर प्रशासनिक शिकायतें दर्ज कराई थीं। बावजूद इसके, संबंधित अधिकारियों द्वारा ठोस कार्रवाई न किए जाने के कारण अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अतिक्रमणकारी अब ग्रामीणों को खुलेआम धमकियां भी दे रहे हैं, जिससे गांव का सामाजिक सौहार्द बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया है।
अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल प्रभाव से मौके पर मुआयना करने, किए गए अवैध पक्के निर्माणों को ध्वस्त करने तथा सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त करवाने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने जनहित और कानून व्यवस्था को देखते हुए दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई कर उन्हें जेल भेजने की मांग की है। यह मामला अब जिले के प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां ग्रामीणों की निगाहें जिला प्रशासन की त्वरित और निर्णायक कार्रवाई पर टिकी हैं।

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