जिले में यूरिया की कालाबाजारी और जमाखोरी को जड़ से समाप्त करने के संकल्प के साथ कृषि विभाग का विशेष अभियान पूरी आक्रामकता से जारी है। इसी कड़ी में विभागीय टीम ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए डूंगला क्षेत्र के एक उर्वरक विक्रेता का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। विभाग की इस औचक कार्रवाई से अवैध भंडारण और अनियमितताओं में संलिप्त अन्य विक्रेताओं में हड़कंप मच गया है।

संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार), जिला परिषद चित्तौड़गढ़ डॉ. शंकर लाल जाट के निर्देशन में 07 मई की सायं एक संयुक्त निरीक्षण दल ने डूंगला स्थित उर्वरक विक्रय प्रतिष्ठान 'मैसर्स राजमल मोहनलाल दाणी' पर आकस्मिक धावा बोला। इस निरीक्षण दल में सहायक निदेशक कृषि (मुख्यालय) मुकेश कुमार धाकड़ एवं कृषि अधिकारी (प्रशिक्षण) गोपाल लाल शर्मा शामिल रहे। जांच के दौरान प्रतिष्ठान पर नियमों की धज्जियां उड़ती पाई गईं। निरीक्षण में पाया गया कि विक्रेता द्वारा निर्धारित प्रारूप में न तो मूल्य सूची प्रदर्शित की गई थी और न ही स्टॉक रजिस्टर उपलब्ध था। इसके अतिरिक्त स्टॉक रजिस्टर का प्राधिकृत अधिकारी से प्रमाणित नहीं होना, उर्वरक अनुज्ञापत्र (लाइसेंस) का प्रदर्शन न करना और विक्रय किए गए उर्वरकों का उचित रिकॉर्ड संधारित न करना जैसे गंभीर उल्लंघन सामने आए। जांच टीम तब और चौंक गई जब दुकान के बजाय सीधे गोदाम से उर्वरक विक्रय होता मिला और भौतिक रूप से उपलब्ध स्टॉक तथा रजिस्टर के आंकड़ों में भारी विसंगति पाई गई।

इन गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए सहायक निदेशक कृषि (मुख्यालय) ने उर्वरक अनुज्ञापत्र निलंबित करने की कड़ी अनुशंसा की, जिस पर त्वरित संज्ञान लेते हुए 08 मई 2026 को मैसर्स राजमल मोहनलाल दाणी का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया। डॉ. शंकर लाल जाट ने जिले के समस्त आदान विक्रेताओं को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे अनिवार्य रूप से नियमों का पालन करें, किसानों को पक्का बिल दें और सभी दस्तावेज व्यवस्थित रखें। उन्होंने कृषकों को आश्वस्त किया कि जिले में वर्तमान में 22,413 मैट्रिक टन यूरिया, 4,120 मैट्रिक टन डीएपी, 4,879 मैट्रिक टन एनपीके और 25,012 मैट्रिक टन एसएसपी का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है, अतः किसान अनावश्यक अग्रिम भंडारण से बचें। कृषि विभाग की यह सतर्क निगरानी और कालाबाजारी के विरुद्ध सख्त दंडात्मक अभियान निरंतर जारी रहेगा।

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