इंद्र देव को मनाने हजारेश्वर महादेव में सहस्त्रधारा जलाभिषेक, बारिश की आस में जुटी आस्था
चित्तौड़गढ़ में कम बारिश से सूखे का संकट गहराया, हजारेश्वर महादेव में इंद्र देव को मनाने सहस्त्रधारा जलाभिषेक किया गया।

तस्वीर में चित्तौड़गढ़ के हजारेश्वर महादेव मंदिर के गर्भगृह में महंत चंद्रभारती (बाएं) और एक पुजारी (दाएं) भगवान शिव का सहस्त्रधारा जलाभिषेक करते हुए दिख रहे हैं।
चित्तौड़गढ़। जिले में इस वर्ष मानसून की बेरुखी ने आमजन से लेकर अन्नदाता तक की चिंता बढ़ा दी है। आधा सावन बीतने को आया है, लेकिन आसमान से राहत की बूंदें बरसने का नाम नहीं ले रही हैं। जिले में इस बार औसत से भी बेहद कम बारिश दर्ज की गई है। जलस्रोत रीते पड़े हैं और खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं।
सूखे के इस संकट से उबरने और मेघराज को प्रसन्न करने के लिए जिलेभर में टोने-टोटके और धार्मिक अनुष्ठानों का दौर शुरू हो गया है। इसी कड़ी में शहर के प्रसिद्ध और प्राचीन शिवालय हजारेश्वर महादेव मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई।
सावन का महीना आधा बीत चुका है, जो आमतौर पर झमाझम बारिश और हरियाली के लिए जाना जाता है, लेकिन इस बार स्थिति इसके ठीक विपरीत है। जिले के अधिकांश छोटे-बड़े बांध और तालाब खाली पड़े हैं। इससे आने वाले समय में पीने के पानी का संकट भी गहरा सकता है।
मानसून की बेरुखी का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ रहा है। फसलों को लेकर किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही हैं। बुवाई के बाद बारिश नहीं होने से फसलें मुरझाने की कगार पर हैं। यदि आगामी कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
ऐसे हालात में इंद्र देव और भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए शहर के प्राचीन हजारेश्वर महादेव मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया गया। मंदिर महंत चंद्रभारती, श्रवण सामवेदी सहित अन्य पुजारियों के सानिध्य में भगवान भोलेनाथ का सहस्त्रधारा जलाभिषेक किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महादेव पर अनवरत जल की धारा प्रवाहित की गई।
सनातन परंपरा में माना जाता है कि जब भी अकाल या सूखे की स्थिति बनती है, तो भगवान शिव का जलाभिषेक या सहस्त्रधारा करने से आशुतोष प्रसन्न होते हैं और इंद्र देव को अमृत वर्षा करने की आज्ञा देते हैं।
हजारेश्वर महादेव मंदिर ही नहीं, बल्कि जिले के ग्रामीण और शहरी इलाकों में भी लोग अपने-अपने स्तर पर टोटके और जतन कर रहे हैं। कहीं मंदिरों में अखंड कीर्तन का आयोजन हो रहा है तो कहीं उज्जैन के महाकाल की तर्ज पर राजा को मनाने के लिए विशेष आरती की जा रही है।
फिलहाल पूरा चित्तौड़गढ़ जिला आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठा है। अब लोगों को बारिश का इंतजार है, ताकि सूखे की मार झेल रही चित्तौड़गढ़ की धरती को राहत मिल सके और किसानों की मुरझाती फसलों को जीवन मिल सके।

Piyush Mundara, Chittorgarh
नाम: पियूष मूंदड़ा
वर्तमान पद: संवाददाता
कार्यक्षेत्र: चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)
अनुभव: साल 2013 से
विशेष रुचि: अपराध (क्राइम) और वन्य जीव (Wildlife) रिपोर्टिंग
बीट और कवरेज
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शैक्षणिक योग्यता
- स्नातक (Graduate)
- डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)
