चित्तौड़गढ़ शहर में लगातार हो रहे अवैध अतिक्रमणों के बीच अब बरसाती नाले पर निर्माण कार्य शुरू होने का मामला सामने आया है। आरोप है कि नगर परिषद की अनदेखी और लापरवाही के चलते अवैध निर्माणकर्ताओं के हौसले बुलंद हो रहे हैं। शहर के बीच से गुजरने वाले बरसाती नाले की चौड़ाई करीब तीन मीटर से अधिक होने के बावजूद नगर परिषद ने इसमें महज दो फीट चौड़ी नाली बनाकर छोड़ दी, जिससे अवैध निर्माणकर्ताओं को नाले की जमीन पर कब्जा करने का अवसर मिल गया।

मामले को लेकर नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि नगर परिषद ने नाले की वास्तविक चौड़ाई को बरकरार रखने के बजाय केवल दो फीट चौड़ी नाली का निर्माण कराया, जिसके बाद नाले के पेटे में अवैध निर्माण शुरू हो गए। इस संबंध में नगर परिषद आयुक्त को जानकारी भी दी गई, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।

जानकारी के अनुसार रेलवे स्टेशन से चामटी खेड़ा होकर नगर पालिका बसंत नगर क्षेत्र से गुजरने वाला यह बरसाती नाला आगे जाकर गंभीरी नदी में मिलता है। नगर परिषद कार्यालय से करीब 200 मीटर की दूरी पर स्थित बसंत नगर कॉलोनी से निकलने वाले इस बरसाती नाले का राजस्व रिकॉर्ड में आराजी नम्बर 2610 दर्ज है। इसकी किस्म नाला अंकित है तथा इसका क्षेत्रफल करीब एक हेक्टेयर से अधिक बताया गया है। राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार नाले की चौड़ाई करीब तीन मीटर से अधिक है, लेकिन आरोप है कि नगर परिषद ने इसमें केवल दो फीट चौड़ी नाली बनवाई, जिसके बाद नाले की भूमि पर अवैध कब्जे और निर्माण शुरू हो गए।

मामले की जानकारी चित्तौड़गढ़ विधायक चंद्र भान सिंह आक्या को भी दी गई। इसके बाद विधायक ने तत्काल नगर परिषद आयुक्त रविंद्र यादव को कार्रवाई के निर्देश दिए। हालांकि आरोप है कि विधायक के निर्देश दिए जाने के एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद नगर परिषद की ओर से अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।

आरोप है कि कार्रवाई नहीं होने के कारण अतिक्रमियों ने बरसाती नाले की जमीन पर अवैध निर्माण शुरू कर दिए हैं। ऐसे में नगर परिषद की कार्यशैली और बरसाती नाले की भूमि की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

Pratahkal Bureau

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