चित्तौड़गढ़। जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट पहल के लिए जिला कलक्टर आलोक रंजन को मंगलवार को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित विशेष समारोह में छठा राष्ट्रीय जल पुरस्कार और जल संचय-जन भागीदारी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार चित्तौड़गढ़ जिले में जल संचय जन भागीदारी 1.0 कार्यक्रम के अंतर्गत किए गए उल्लेखनीय और राष्ट्रीय स्तर के कार्यों के लिए प्रदान किया गया।

इस उपलब्धि के फलस्वरूप जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार ने जिले को पश्चिमी जोन श्रेणी 3 में 25 लाख रुपये की राशि भी प्रदान की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने समारोह में अपने संबोधन में कहा कि जल का कुशल उपयोग आज वैश्विक आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत की विशाल जनसंख्या के सामने जल संसाधन सीमित हैं, इसलिए जल संरक्षण और इसके सुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

राष्ट्रपति ने केंद्र व राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, ग्राम पंचायतों और नगर निकायों द्वारा जल संरक्षण, कृत्रिम भूजल पुनर्भरण और जनभागीदारी के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह पहल समुदायों में जल संरक्षण की भावना को प्रबल करने और जल उपयोग की सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रेरित करती है।

जल संचय-जन भागीदारी पहल ने सामुदायिक सहभागिता और संसाधनों के समन्वय के माध्यम से विभिन्न प्रभावी मॉडल विकसित किए हैं, जो अन्य जिलों और राज्यों के लिए अनुकरणीय साबित हो रहे हैं। इस पुरस्कार ने न केवल जिला प्रशासन की कार्यक्षमता को मान्यता दी है, बल्कि पूरे क्षेत्र में जल संरक्षण और सतत विकास के महत्व को भी उजागर किया है।

चित्तौड़गढ़ के लिए यह राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धि जिले में जल संसाधनों के संवर्धन और स्थायी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।

Pratahkal Bureau

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