चित्तौड़गढ़: मनरेगा के वजूद पर मंडराते संकट के खिलाफ कांग्रेस का 'संग्राम', गांधीवादी विचारधारा को बचाने के लिए उपवास पर बैठे दिग्गज
चित्तौड़गढ़ में पूर्व मंत्री उदयलाल आंजना के नेतृत्व में कांग्रेस ने 'मनरेगा बचाओ संग्राम आंदोलन' के तहत केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। भाजपा पर महात्मा गांधी की सोच को खत्म करने और ग्रामीण मजदूरों के कानूनी अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने 45 दिनों के राष्ट्रव्यापी संघर्ष का ऐलान किया है। जानिए मनरेगा के बदलते स्वरूप और मजदूरों की मांगों पर क्या बोले दिग्गज नेता।

चित्तौड़गढ़। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में सियासत की तपिश उस समय बढ़ गई जब कलेक्ट्रेट चौराहा स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने 'मनरेगा बचाओ संग्राम आंदोलन' के तहत हुंकार भरी। पूर्व मंत्री उदयलाल आंजना के नेतृत्व में आयोजित इस एक दिवसीय उपवास ने न केवल केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया, बल्कि इसे ग्रामीण भारत के स्वाभिमान और संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला करार दिया। आंजना ने बेहद कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार महात्मा गांधी की दूरगामी सोच को देश से समाप्त करने का कुत्सित प्रयास कर रही है। उनके अनुसार, मनरेगा महज एक सरकारी योजना नहीं बल्कि करोड़ों मजदूरों के लिए जीवन जीने की एक कानूनी गारंटी है, जिसे कमजोर करना ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ तोड़ने जैसा है।
इस आंदोलन के दौरान पूर्व मंत्री ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार मनरेगा के नाम और स्वरूप को बदलकर इसकी मूल आत्मा को नष्ट करने की साजिश रच रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि योजना का वित्तीय भार राज्यों पर डालकर मजदूरों को उनके अधिकारों से वंचित करने के किसी भी प्रयास को कांग्रेस सफल नहीं होने देगी। जिला अध्यक्ष प्रमोद सिसोदिया ने इस विमर्श को आगे बढ़ाते हुए कहा कि भाजपा ने योजना का नाम बदलकर 'जी राम जी' कर दिया है, जिससे यह अब रोजगार की 'गारंटी' के बजाय मात्र एक 'संभावना' बनकर रह गई है। सिसोदिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि जहां पूर्व में केंद्र सरकार इसका शत-प्रतिशत खर्च वहन करती थी, वहीं अब इसे धीरे-धीरे खत्म करने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने मांग की कि रोजगार के दिनों को सुनिश्चित कर दैनिक मजदूरी को बढ़ाकर 400 रुपये किया जाना चाहिए।
वक्ताओं ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि ग्रामीण मजदूरों की करोड़ों रुपये की मजदूरी आज भी बकाया है। उन्होंने इसे कानून की आत्मा के साथ खिलवाड़ बताया। प्रदर्शन के अंत में एक स्वर में संकल्प लिया गया कि 12 जनवरी से यह आंदोलन केवल जिला मुख्यालय तक सीमित न रहकर गांव-गांव की चौपालों तक पहुंचेगा। आगामी 45 दिनों तक 'सड़क से संसद तक' चलने वाले इस संघर्ष का उद्देश्य जनता को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। इस महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन में प्रदेश सचिव डॉ. ललित बोरीवाल, रंजना लाड़, पूर्व डेयरी चेयरमैन बद्रीलाल जाट, संदीप शर्मा, सुभाष शारदा, पीयूष त्रिवेदी, प्रमोद मोदी, सुमंत सुहालका, और अहसान पठान सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस के निष्ठावान पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिन्होंने इस वैचारिक लड़ाई को अंतिम छोर तक ले जाने का संकल्प दोहराया।

Piyush Mundara, Chittorgarh
नाम: पियूष मूंदड़ा
वर्तमान पद: संवाददाता
कार्यक्षेत्र: चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)
अनुभव: साल 2013 से
विशेष रुचि: अपराध (क्राइम) और वन्य जीव (Wildlife) रिपोर्टिंग
बीट और कवरेज
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शैक्षणिक योग्यता
- स्नातक (Graduate)
- डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)
