चित्तौड़गढ़। ग्रामीण भारत की जीवनरेखा माने जाने वाले महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को बचाने के लिए कांग्रेस पार्टी ने भाजपा सरकार के खिलाफ निर्णायक जंग का ऐलान कर दिया है। चित्तौड़गढ़ जिला मुख्यालय पर आज लोकतंत्र का एक अनोखा दृश्य देखने को मिला, जहाँ जिला कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में जिलाध्यक्ष प्रमोद सिसोदिया के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर भारी संख्या में कांग्रेसजनों ने सामूहिक उपवास रखकर सरकार की नीतियों के प्रति अपना आक्रोश व्यक्त किया। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारें इस ऐतिहासिक जनकल्याणकारी कानून को सोची-समझी रणनीति के तहत कमजोर कर रही हैं, जिससे सीधे तौर पर गरीब श्रमिकों और ग्रामीण परिवारों के रोजगार अधिकारों पर प्रहार हो रहा है।

इस 'मनरेगा बचाओ संग्राम' के दौरान चित्तौड़गढ़ की धरती पर राजनीतिक हलचल अपने चरम पर रही। जिलाध्यक्ष प्रमोद सिसोदिया ने कड़े शब्दों में कहा कि भाजपा सरकार मनरेगा योजना को धीरे-धीरे बंद करने का षड्यंत्र रच रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस न केवल इस योजना को यथावत रखने की मांग करती है, बल्कि श्रमिकों के मानदेय में वृद्धि के लिए भी सरकार पर चौतरफा दबाव बनाएगी। यह आंदोलन केवल एक दिन का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि 'सड़क से सदन तक' चलने वाली एक लंबी लड़ाई की शुरुआत है। आंदोलन के प्रथम चरण में आज पूरे राजस्थान के जिला मुख्यालयों पर एक साथ उपवास रखकर सत्ता के गलियारों तक चेतावनी का संदेश भेजा गया है।

आंदोलन की रूपरेखा को साझा करते हुए बताया गया कि 25 फरवरी तक चलने वाले इस राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत कांग्रेस जन-जन तक पहुँचेगी। आगामी 12 से 29 जनवरी तक जिले की सभी ग्राम पंचायतों में चौपालों का आयोजन होगा, जहाँ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के पत्रों को ग्राम प्रधानों, पूर्व ग्राम प्रधानों, रोजगार सेवकों और श्रमिकों को वितरित किया जाएगा। इसके बाद विधानसभा स्तरीय नुक्कड़ सभाएं, 30 जनवरी को वार्ड स्तरीय शांतिपूर्ण धरना, और फरवरी माह में जिला स्तरीय धरने से लेकर विधानसभा घेराव और विशाल रैलियों के माध्यम से भाजपा की 'जनविरोधी' नीतियों को बेनकाब किया जाएगा।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर चित्तौड़गढ़ के राजनीतिक दिग्गजों का जमावड़ा रहा। कार्यक्रम में संभाग प्रभारी हगामी लाल मेवाड़ा, पीसीसी सदस्य ललित बोरिवाल, बद्रीलाल जाट जगपुरा, सुमंत सुहालका, संदीप शर्मा, अहसान पठान, संजय शर्मा और शेलेंद्र सिंह चुण्डावत सहित जिले के पूर्व सांसद, पूर्व विधायक, पूर्व प्रधान, ब्लॉक अध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष तथा अग्रिम संगठनों एवं विभिन्न प्रकोष्ठों के पदाधिकारी और निष्ठावान कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे। कांग्रेस के इस कड़े रुख ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह ग्रामीण भारत के अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ को बर्दाश्त नहीं करेगी और मनरेगा की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष जारी रखेगी।

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