बालश्रम मुक्त चित्तौड़गढ़ का संकल्प: जिला प्रशासन ने कसी कमर, बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़े कदम
विश्व बालश्रम निषेध दिवस पर जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने अधिकारियों को बच्चों के रेस्क्यू और शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के निर्देश दिए।

विश्व बालश्रम निषेध दिवस पर चित्तौड़गढ़ जिला कलेक्ट्रेट में पोस्टर विमोचन कार्यक्रम के दौरान जिला कलक्टर डॉ. मंजू और प्रशासनिक अधिकारी।
चित्तौड़गढ़ की माटी से बालश्रम के कलंक को मिटाने और हर बच्चे के चेहरे पर शिक्षा की मुस्कान बिखेरने के लिए जिला प्रशासन ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल की है। विश्व बालश्रम निषेध दिवस के पावन अवसर पर, जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने एक सशक्त संदेश देते हुए जिले को पूर्णतः बालश्रम मुक्त बनाने का आह्वान किया। जिला कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में न केवल प्रशासनिक सख्ती दिखी, बल्कि समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने का संकल्प भी मुखर हुआ।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 'बालश्रम मुक्त चित्तौड़गढ़' अभियान के पोस्टर का विमोचन और बालश्रम निषेध संकल्प हस्ताक्षर अभियान रहा। जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने स्वयं फ्लेक्स पर हस्ताक्षर कर इस मुहिम को गति प्रदान की। उन्होंने स्पष्ट रूप से निर्देश दिए कि जिले के किसी भी कोने में कोई बच्चा श्रम के दुष्चक्र में न फंसा रहे। प्रशासन को निर्देशित किया गया है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों, समाजसेवी संस्थाओं और जागरूक नागरिकों के सक्रिय सहयोग से नियमित रूप से जनजागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं और रेस्क्यू अभियान को अधिक प्रभावी बनाया जाए।
प्रशासन की योजना केवल बच्चों को बालश्रम से मुक्त कराने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उनके पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जिला कलक्टर ने अधिकारियों को कड़ी हिदायत दी कि रेस्क्यू किए गए प्रत्येक बच्चे का विद्यालय में प्रवेश सुनिश्चित किया जाए ताकि वे शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़कर अपने भविष्य को सुरक्षित कर सकें। बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक ओम प्रकाश तोषणीवाल ने इस प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि प्रशासन इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रहा है।
इस अवसर पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनय पाठक, अतिरिक्त कलक्टर दिनेश कुमार धाकड़ और रामचन्द्र खटीक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकुल शर्मा सहित उपखंड अधिकारी बीनू देवल, कोषाधिकारी दिग्विजय सिंह झाला और मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी प्रमोद दशोरा उपस्थित रहे। कार्यक्रम में राजकीय सम्प्रेषण एवं किशोर गृह के अधिकारियों और विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं की गरिमामयी उपस्थिति ने इस अभियान को एक जन-आंदोलन का स्वरूप दे दिया है।
बालश्रम के विरुद्ध यह सामूहिक संकल्प इस बात का प्रतीक है कि चित्तौड़गढ़ अब अपने बच्चों के बेहतर और आत्मनिर्भर भविष्य के प्रति पूर्णतः सजग है। जब प्रशासन की सख्ती और समाज की सहभागिता एक साथ जुड़ती है, तो बदलाव की नींव अनिवार्य रूप से मजबूत होती है। यह अभियान न केवल कानूनों का पालन सुनिश्चित करेगा, बल्कि एक ऐसे चित्तौड़गढ़ का निर्माण करेगा जहाँ बचपन के अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।

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