चित्तौड़गढ़। नन्हे हाथों में किताबों की जगह औजार और बचपन की किलकारियों के स्थान पर बाल मजदूरी की बेड़ियाँ—इस कुरीति को जड़ से मिटाने के लिए चित्तौड़गढ़ के न्यायालय परिसर में एक सशक्त पहल का उदय हुआ। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और बाल अधिकारिता विभाग द्वारा आयोजित एक वृहद हस्ताक्षर अभियान ने न केवल बाल श्रम और भिक्षावृत्ति के विरुद्ध एक वैचारिक क्रांति का शंखनाद किया, बल्कि समाज को बच्चों के अधिकारों के प्रति सजग रहने का आईना भी दिखाया।

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ प्राधिकरण के अध्यक्ष मानसिंह चुण्डावत द्वारा किया गया। इस दौरान न्यायालय परिसर का वातावरण उस समय संकल्पों से ओत-प्रोत हो गया, जब न्यायिक अधिकारियों, प्रबुद्ध अधिवक्ताओं, पीएलवी, बाल अधिकारिता विभाग के कर्मियों और आमजन ने एक-एक करके हस्ताक्षर कर अपनी अटूट प्रतिबद्धता व्यक्त की। यह हस्ताक्षर केवल स्याही के निशान नहीं थे, बल्कि उन हजारों बच्चों के प्रति समाज का वादा था, जो शिक्षा, सुरक्षा और एक सम्मानपूर्ण बचपन की बाट जोह रहे हैं।

सभा को संबोधित करते हुए प्राधिकरण अध्यक्ष मानसिंह चुण्डावत ने स्पष्ट किया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जनमानस को बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराई के प्रति झकझोरना और बच्चों के संरक्षण के लिए एक सुरक्षित वातावरण का निर्माण करना है। प्राधिकरण की सचिव योगिता पारीक ने आमजन से मानवीय संवेदनाओं को जागृत करते हुए अपील की कि वे बाल श्रम या भिक्षावृत्ति की किसी भी घटना के प्रति मूकदर्शक न रहें। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण और संबंधित विभागों को सूचना देकर प्रत्येक नागरिक बच्चों को विद्यालय की मुख्यधारा से जोड़ने और उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा में अपना सक्रिय सहयोग सुनिश्चित करे।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में उपस्थित सभी गणमान्य जनों ने बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण हेतु सामूहिक संकल्प लिया। इस अवसर पर एन.डी.पी.एस. कोर्ट संख्या 01 के विशिष्ट न्यायाधीश किशन लाल चौधरी, पारिवारिक न्यायालय की न्यायाधीश अचला आर्य, पोक्सो कोर्ट संख्या 01 की विशिष्ट न्यायाधीश लता गौर, पोक्सो कोर्ट संख्या 02 की विशिष्ट न्यायाधीश शहनाज परवीन, एडीजे 03 के न्यायाधीश ब्रह्मानंद शर्मा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पंकज कुमार काबरा और ग्राम न्यायालय की न्यायिक अधिकारी वीणा सुवालका सहित राजकीय सम्प्रेक्षण एवं किशोर गृह के अधीक्षक चंद्रप्रकाश जीनगर और चाइल्ड हेल्पलाइन के समन्वयक नवीन काकड़दा आदि उपस्थित रहे। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि यदि समाज और कानून का हाथ मिले, तो बचपन को कुरीतियों के अंधेरे से निकालकर खुशहाली के उजाले में लाया जा सकता है।

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