राष्ट्रीय संगठन ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (एआईओसीडी) एवं प्रदेश केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर चित्तौड़गढ़ जिले में दवा व्यवसाय पूर्णतया बंद रहा। जिला केमिस्ट एसोसिएशन के तत्वावधान में जिले भर के दवा व्यापारियों ने बुधवार को अपनी दुकानें और प्रतिष्ठान पूरी तरह बंद रखे। इस दौरान दवा व्यवसायियों ने उग्र प्रदर्शन करते हुए प्रशासन को अपनी विभिन्न मांगों का एक ज्ञापन सौंपा।

कन्हैयालाल गर्ग ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि जिले भर के केमिस्ट व्यवसायी कलेक्ट्री चौराहा पर एकत्रित हुए। यहाँ जिला केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश मेहता व सचिव सुशील अग्रवाल के नेतृत्व में दवा व्यापारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की। पदाधिकारियों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र एवं राज्य स्तर पर विभिन्न प्राधिकरणों के समक्ष बार-बार निवेदन करने के बावजूद औषधि व्यापार एवं जन स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले गंभीर मुद्दे अब तक अनसुलझे पड़े हैं। इन अनसुलझी समस्याओं के कारण देश के 12.40 लाख से अधिक केमिस्ट्स तथा उन पर निर्भर लगभग 4 से 5 करोड़ आश्रितों की आजीविका पर एक बड़ा संकट उत्पन्न हो गया है। इसी के विरोध स्वरूप राष्ट्रीय संस्था एआईओसीडी ने लंबे समय से लंबित इन मुद्दों को लेकर 20 मई को एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी दवा व्यापार बंद का आह्वान किया था, जिसे चित्तौड़गढ़ में व्यापक समर्थन मिला।

दवा व्यवसायियों ने वर्तमान कानूनी व नीतिगत विसंगतियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। प्रदर्शनकारियों ने वर्तमान औषधि वितरण प्रणाली को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही अवैध ई-फार्मेसियों की अनियंत्रित वृद्धि पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। इसके साथ ही बड़े कॉरपोरेट्स द्वारा अपनाई जा रही प्रिडेटोरी मूल्य निर्धारण की प्रवृत्तियों और उनके द्वारा दी जा रही अत्यधिक छूट की नीतियों का कड़ा विरोध किया गया। केमिस्टों का आरोप है कि इन कॉरपोरेट नीतियों के कारण छोटे केमिस्ट्स के अस्तित्व को बचाए रखने में भारी कठिनाइयां उत्पन्न हो रही हैं। इसके अलावा, ऑनलाइन व कॉरपोरेट माध्यमों द्वारा ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स नियमों के अंतर्गत आवश्यक सुरक्षा प्रावधानों को लगातार दरकिनार किये जाने का भी पुरजोर विरोध किया गया।

इस विशाल प्रदर्शन और बंदी के दौरान दवा व्यापार जगत से जुड़े ओम भंडारी, अरविन्द सोमानी, अनुराग द्विवेदी, अरूण लड्ढा, विष्णु आमेरिया, पवन पाटनी, अनुपम जैन, गोपाल शर्मा, अरूण खाब्या, सुनिल सिंघवी, राजेश खत्री, राघव कनेरिया, दिनेश शर्मा, मुकेश सरावगी, राहुल तोतला, बालमुकुन्द मालू, नरेन्द्र भंडारी, शैलेश पाटनी, जिनेन्द्र खेरोदिया सहित सैंकड़ों की संख्या में दवा व्यवसायी मौके पर मौजूद रहे। जिले भर में दवा आजीविका और जन स्वास्थ्य सुरक्षा के हक में उठी इस सामूहिक आवाज ने कॉरपोरेट एकाधिकार के खिलाफ छोटे व्यापारियों के संकल्प को रेखांकित किया है।

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