चित्तौड़गढ़। राजस्थान की मखमली गुलाबी सर्दी और किलों की गौरवशाली विरासत के बीच विश्व प्रसिद्ध शाही ट्रेन 'पैलेस ऑन व्हील्स' ने साल 2026 की अपनी पहली गौरवमयी यात्रा का शुभारंभ किया है। नए साल के पहले शुक्रवार की ढलती शाम जब यह शाही ट्रेन चित्तौड़गढ़ रेलवे स्टेशन पर रुकी, तो वहां का माहौल उत्सव और उल्लास से भर उठा। अपने 12वें फेरे पर निकली इस ट्रेन में सवार 76 मेहमानों ने न केवल मेवाड़ की धरती पर कदम रखा, बल्कि भारतीय आतिथ्य सत्कार की उस पराकाष्ठा को भी महसूस किया, जिसका सपना उन्होंने सात समंदर पार संजोया था।

नए साल के स्वागत का जश्न किसी भव्य महल से कम नहीं था। ट्रेन के 'महाराजा' और 'महारानी' रेस्टोरेंट में गुरुवार की पूरी रात उत्सव के नाम रही। संगीत की सुमधुर लहरियों के बीच विदेशी मेहमानों ने जमकर नृत्य किया और मध्यरात्रि के ठीक 12 बजते ही एक-दूसरे को नववर्ष की शुभकामनाएं दीं। शाही डिनर में परोसे गए देश-विदेश के चुनिंदा व्यंजनों ने इस जश्न के स्वाद को दोगुना कर दिया। इस विशेष यात्रा में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की पर्यटन साख साफ दिखाई दी, जहाँ कुल 76 पर्यटकों में से 61 अमेरिका से, 8 भारत से, 2 स्विट्जरलैंड से, 2 ब्रिटेन से, 2 कनाडा से और 1 पर्यटक जर्मनी से शामिल हुए। इनमें कई प्रवासी भारतीय (NRI) मेहमान भी अपनी जड़ों की ओर लौटने के उत्साह के साथ शामिल थे।

पर्यटन के इस चरम सीजन को देखते हुए प्रशासन ने भी सुरक्षा और सुविधा के पुख्ता इंतजाम किए। स्टेशन से दुर्ग भ्रमण के लिए 4 वातानुकूलित बसें और 3 विशेष कारें तैनात की गईं। पैलेस ऑन व्हील्स के असिस्टेंट जनरल मैनेजर विष्णु चौधरी ने इस यात्रा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह नए साल का पहला फेरा है। उन्होंने साझा किया कि ट्रेन के तय कार्यक्रम के अनुसार पर्यटकों को रानी पद्मिनी महल और विजय स्तंभ जैसे ऐतिहासिक स्मारकों का भ्रमण कराया जाता है। इसके पश्चात राणा सांगा महल में आयोजित होने वाला 'लाइट एंड साउंड शो' इस पूरी यात्रा का मुख्य आकर्षण केंद्र रहता है, जो चित्तौड़गढ़ के शौर्य की गाथा को जीवंत कर देता है।

यात्रा के दौरान मेहमानों के चेहरे पर प्रसन्नता और संतुष्टि के भाव स्पष्ट झलक रहे थे। अमेरिका के ह्यूस्टन शहर से सपरिवार आए पर्यटक नंदन चिरामा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि 'पैलेस ऑन व्हील्स' के जरिए राजस्थान की यात्रा करना उनकी बकेट लिस्ट में लंबे समय से शामिल था। उन्होंने ट्रेन की सेवाओं को उनकी उम्मीदों से कहीं अधिक बेहतर और जादुई बताया। चित्तौड़गढ़ की ऐतिहासिक आभा को निहारने के बाद अब यह शाही कारवां अपने अगले पड़ाव, झीलों की नगरी उदयपुर की ओर प्रस्थान करेगा। यह आयोजन न केवल राजस्थान पर्यटन के लिए एक सफल शुरुआत है, बल्कि यह विश्व पटल पर भारतीय संस्कृति और शाही विरासत की अटूट चमक को भी प्रमाणित करता है।

Pratahkal Newsroom

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