चित्तौड़गढ़ में बस दुर्घटना: जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का जाना हाल
उदयपुर-चित्तौड़गढ़ हाईवे पर श्रद्धालुओं से भरी बस पलटने से एक की मौत, कई घायल। जिला कलक्टर ने अस्पताल में त्वरित इलाज और मामले की जांच के निर्देश दिए।

चित्तौड़गढ़ में बस हादसे के बाद जिला चिकित्सालय के वार्ड में भर्ती घायल मरीज के उपचार की व्यवस्थाओं का जायजा लेतीं जिला कलक्टर डॉ. मंजू (गुलाबी परिधान में)। इस दौरान उनके साथ पुलिसकर्मी और प्रमुख चिकित्सा अधिकारी उपस्थित रहे।
चित्तौड़गढ़। उदयपुर-चित्तौड़गढ़ सिक्स लेन पर भादसोड़ा थाना क्षेत्र के बागुंड गांव के पास श्रद्धालुओं से भरी एक निजी बस भीषण हादसे का शिकार हो गई, जिसमें एक श्रद्धालु की दुःखद मृत्यु हो गई। चित्तौड़गढ़ से श्रद्धालुओं को लेकर सांवलिया जी मंदिर जा रही इस बस की दुर्घटना की सूचना मिलते ही जिला कलक्टर डॉ. मंजू तुरंत जिला चिकित्सालय पहुंचीं। उन्होंने वहां भर्ती घायलों की कुशलक्षेम जानी और संपूर्ण उपचार व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस हादसे में तीन गंभीर घायलों को बेहतर और त्वरित उपचार के लिए उदयपुर रेफर किया गया है, जहां उनका इलाज प्रारंभ करवा दिया गया है, जबकि अन्य घायल श्रद्धालुओं का जिला चिकित्सालय में भर्ती कर गहन उपचार किया जा रहा है।
घटनाक्रम के बाद जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने चिकित्सालय में उपचाराधीन घायलों एवं उनके चिंतित परिजनों से सीधे संवाद कर उनके स्वास्थ्य की स्थिति की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने संवेदनशीलता दिखाते हुए चिकित्सकों को सभी घायलों का त्वरित, संवेदनशील एवं उच्च गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए। जिला कलक्टर ने स्पष्ट किया कि घायलों के इलाज में किसी भी स्तर पर रत्ती भर भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा आवश्यक दवाइयों, जांचों एवं समस्त चिकित्सा सुविधाओं की शत-प्रतिशत उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। जिला प्रशासन द्वारा पीड़ित घायलों एवं उनके परिजनों को हर संभव सहायता मुहैया कराई जा रही है।
दुर्घटना के कारणों को लेकर बस में सवार प्रत्यक्षदर्शी यात्रियों ने बताया कि बस की गति अत्यधिक तेज होने के कारण यह दर्दनाक हादसा घटित हुआ। यात्रियों के इस बयान पर गंभीरता दिखाते हुए जिला कलक्टर ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के निर्देश जारी कर दिए हैं, ताकि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का सटीक पता लगाया जा सके और भविष्य में हाइवे पर ऐसी भीषण घटनाओं की पुनरावृत्ति को पूरी तरह रोका जा सके। इसके साथ ही जिला कलक्टर ने चिकित्सालय परिसर में साफ-सफाई, निर्बाध बिजली एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए प्रमुख चिकित्सा अधिकारी को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने परिसर में कचरे में आग लगाने पर पूर्ण पाबंदी लगाते हुए नगर परिषद के माध्यम से कचरे का नियमित एवं व्यवस्थित निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा और दोहराया कि मरीजों एवं परिजनों को चिकित्सालय में स्वच्छ, सुरक्षित एवं बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस दौरान अतिरिक्त जिला कलक्टर (प्रशासन) दिनेश चंद्र धाकड़, तहसीलदार, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी दिनेश वैष्णव, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ताराचंद गुप्ता सहित अन्य प्रशासनिक एवं चिकित्सा अधिकारी मौके पर उपस्थित रहे, जो चिकित्सालय में उपचार एवं व्यवस्थाओं की सतत मॉनिटरिंग कर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर रहे हैं।

