चित्तौड़गढ़। नगर परिषद की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक अनदेखी बेजुबान जानवरों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। शहर के विभिन्न रिहायशी और व्यावसायिक इलाकों में खुले पड़े नाले अब मवेशियों के लिए 'जी का जंजाल' बन चुके हैं, जहाँ आए दिन मवेशी गिरकर गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं या अकाल मृत्यु का ग्रास बन रहे हैं। बुधवार को ऐसा ही एक भयावह मंजर जिला कारागृह के मुख्य द्वार के सामने देखने को मिला, जहाँ एक सांड अनियंत्रित होकर गहरे और संकरे नाले में जा गिरा। नाले की गहराई और चौड़ाई कम होने के कारण सांड उसमें इस कदर फंस गया कि उसका स्वयं बाहर निकल पाना पूरी तरह असंभव हो गया था।

जैसे ही सांड के नाले में गिरने की सूचना प्रसारित हुई, मौके पर स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों का भारी मजमा एकत्रित हो गया। स्थिति बेहद जटिल थी क्योंकि नाला ऊपर से पक्का बना हुआ था और कई स्थानों पर दुकानों के सामने से पूरी तरह ढका हुआ था, जिस वजह से सांड को सीधे तौर पर बाहर निकालना मुमकिन नहीं था। घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जेसीबी मशीन मंगवाई गई। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान दुकानों के बाहर बने पक्के निर्माण और नाले के ऊपरी कंक्रीट हिस्से को जेसीबी की सहायता से तोड़ना पड़ा, जिसके बाद ही सांड को सुरक्षित बाहर निकालने का मार्ग प्रशस्त हो सका।

उल्लेखनीय है कि शहर में यह इस प्रकार की पहली घटना नहीं है; इससे पूर्व भी चित्तौड़गढ़ के विभिन्न हिस्सों में कई बेजुबान जानवर इन खुले नालों में गिरकर काल का ग्रास बन चुके हैं। इन पुनरावृत्त होती घटनाओं ने स्थानीय नागरिकों में गहरा रोष पैदा कर दिया है। क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन और नगर परिषद से पुरजोर मांग की है कि समूचे शहर के खुले नालों का अविलंब सर्वे करवाया जाए और उन्हें सुरक्षित रूप से ढका जाए। नागरिकों का स्पष्ट कहना है कि यदि समय रहते इन 'डेथ ट्रैप' को बंद नहीं किया गया, तो भविष्य में कोई बड़ी जनहानि या भीषण हादसा होने से इंकार नहीं किया जा सकता।

Pratahkal Newsroom

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